पीएम की विशेष अपील के बाद अब आरबीआई गवर्नर ने देश के लोगों को चेताया
Petrol-Diesel Price Hike (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच जारी होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर गतिरोध अभी भी बरकरार है। वहीं इन दोनों के बीच शांति समझौते की संभावना भी काफी कम दिखाई दे रही है। जिससे विश्व के कई देशों में पेट्रोलियम पदार्थों की सप्लाई लगातार प्रभावित हो रही है। भारत भी इसी स्थिति से गुजर रहा है।
ज्ञात रहे कि भारत विश्व के उन देशों में शामिल है जहां पर पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की दैनिक मांग बहुत ज्यादा है। वहीं भारत पेट्रोलियम जरूरतों को पूरा करने के लिए लगभग पूरी तरह से दूसरे देशों पर निर्भर है। इसमें से भी ज्यादात्तर मांग पश्चिम एशिया के देश पूरी करते हैं। हम हालात तनावपूर्ण बनने के चलते पेट्रोलियम पदार्थों की सप्लाई बाधित हो रही है।
पीएम के बाद आरबीआई गवर्नर ने दिए अहम संकेत
ज्ञात रहे कि गत दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों से पेट्रोल और डीजल का कम से कम उपयोग करने की सलाह दी थी। अब आरबीआई गवर्नर ने देश के लोगों को चेताया है कि यदि जल्द हालात न सुधरे तो देश में पेट्रोल और डीजल के दाम जल्द बढ़ सकते हैं। ज्यूरिख में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और स्विस नेशनल बैंक की ओर से आयोजित 12वें उच्च-स्तरीय सम्मेलन में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में जो भारी उछाल आया है, उसका बोझ अब तक सरकार उठा रही है। लेकिन, अगर यह वैश्विक व्यवधान लंबे समय तक खिंचता है, तो आम उपभोक्ताओं को ईंधन की बढ़ी हुई कीमतों का सामना करना पड़ सकता है।
इसलिए जरूरी हो जाएगी कीमतों में वृद्धि
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि के बावजूद, भारत सरकार ने अब तक पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों को स्थिर रखा है। इसके लिए सरकार ने अपनी तरफ से ड्यूटी कम करने और गैस जैसी कुछ नियंत्रित कीमतों में मामूली वृद्धि करने जैसे कदम उठाए हैं। आरबीआई गवर्नर के अनुसार, पिछले 75 दिनों से अधिक समय से जारी इस संकट के कारण मौजूदा स्थिति को अनिश्चित काल तक बनाए रखना संभव नहीं होगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो यह केवल समय की बात है कि सरकार इन बढ़ी हुई कीमतों का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं पर डाल देगी। हालांकि, उन्होंने इस बात की भी सराहना की कि महामारी के दौरान 9.2 प्रतिशत तक पहुंच चुके राजकोषीय घाटे को सरकार ने राजकोषीय विवेक का पालन करते हुए करीब 4.3 प्रतिशत तक सफलतापूर्वक कम कर लिया है।
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