रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की फीस वसूली के लिए ईरान और ओमान कर रहे मंथन
West Asia Crisis (द भारत ख़बर), तेहरान/वॉशिंगटन : अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक और बड़ी खबर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सामने आ रही है। एक तरफ जहां अमेरिका और ईरान होर्मुज पर अपना-अपना कब्जा होने की बात कह रहे हैं। वहीं अंतरराष्टÑीय मीडिया के हवाले से यह जानकारी सामने आई है कि ईरान जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले समुद्री जहाजों से टैक्स वसूलना शुरू करने जा रहा है।
हालांकि वह सीधे तौर पर टैक्स नहीं वसूलेगा बल्कि इसमें वह ओमान को अपने साथ लेने की सोच रहा है। इसी को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत भी चल रही है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान सीधे टोल लगाने के बजाय सर्विस फीस मॉडल पर काम कर रहा है। इसमें जहाजों से ट्रांजिट फीस, पर्यावरण शुल्क और अन्य सेवाओं के नाम पर रकम ली जा सकती है। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि अगर ईरान होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों से टोल वसूलता है, तो अमेरिका-ईरान समझौता मुश्किल हो जाएगा। ट्रम्प ने भी कहा कि होर्मुज एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ता है और यहां टोल मंजूर नहीं होगा।
पीजीएसए का यह बयान आया सामने
रिपोर्ट के मुताबिक ईरान की नई बनाई गई पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (पीजीएसए) ने कहा कि उसने होर्मुज स्ट्रेट के मैनेजमेंट सुपरविजन एरिया की सीमा तय कर दी है। अथॉरिटी के मुताबिक, यहां से गुजरने के लिए परमिट जरूरी होगा। ज्ञात रहे कि विश्व सप्लाई के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य बहुत ही अहम मार्ग है और दुनिया के करीब 20% समुद्री तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट से गुजरती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह के शुल्क या प्रतिबंध का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और शिपिंग पर पड़ सकता है।
मार्च के पहले सप्ताह में ईरान ने बंद किया था होर्मुज
फरवरी में अमेरिकी और इजराइली हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल ट्रैफिक लगभग रोक दिया था। इससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग प्रभावित हुई और ऊर्जा कीमतों में तेजी आई। इसके बाद ईरानी अधिकारियों ने इस जलमार्ग से राजस्व जुटाने के विकल्पों पर चर्चा शुरू की।
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