देशभर के करीब 1.2 करोड़ अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को होगा लाभ
SC-OBC-Scholarship Rules, (द भारत ख़बर), नई दिल्ली: अनुसूचित जाति (एससी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों के लिए खुशखबरी है। केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं में निवास प्रमाण पत्र की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। सरकार के इस फैसले से देशभर के करीब 1.2 करोड़ अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को लाभ होगा।
इस कदम को लेकर मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य छात्रों पर पड़ने वाले दस्तावेजीकरण के बोझ को कम कर अनुपालन लागत को घटाना और पात्र छात्रों के लिए छात्रवृत्ति लाभों तक सुगम पहुंच को सक्षम बनाना है।
छात्रों और उनके माता-पिता को बड़ी राहत
अपने गृह राज्य से बाहर पढ़ रहे छात्रों को पढ़ाई छोड़ सर्टिफिकेट बनवाने के लिए घर आने और उसे बनवाने में बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता था। इससे न सिर्फ छात्र ही बल्कि उनके माता-पिता को भी तहसील के चक्कर लगाने पड़ते थे।
इससे उनके मजदूरी का भी नुकसान होता था। कई मामलों में तो जल्दी बनवाने के चक्कर में दलालों को मोटी रकम भी देनी पड़ती थी। सरकार ने प्रशासनिक पेचीदगियों को खत्म कर देने से छात्रों और उनके माता-पिता को बड़ी राहत मिलेगी।
भारत में कितने एससी और ओबीसी के छात्र?
शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय विश्वविद्यालयों में अनुसूचित जाति (एससी) के 14.2% और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के 35.8% छात्र नामांकित हैं, जबकि कुल नामांकन संख्या 4.13 है। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण और जनगणना के प्रवासन आंकड़ों से पता चलता है कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले लगभग 30-35% छात्र अपने गृह जिले से बाहर अध्ययन करते हैं।
एससी विद्यार्थियों के लिए आय सीमा
सरकार द्वारा चलाई जा रही इन दोनों छात्रवृत्ति योजनाओं से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को पढ़ाई न छोड़ने में मदद मिलती है। इसका लाभ एससी छात्र (प्री-मैट्रिक)- कक्षा 9वीं और 10वीं के उन छात्रों को मिलती है, जिनके माता-पिता की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये तक है। इसका लाभ 10वीं के बाद से लेकर पीएचडी तक की उच्च शिक्षा के लिए मिलता है।
ओबीसी विद्यार्थियों के लिए आय सीमा
वहीं, ओबीसी छात्रों के लिए स्कॉलरशिप योजनाएं प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक चलती हैं। इसका लाभ उन ओबीसी छात्रों को मिलता है, जिनका पारिवारिक आय 2.5 लाख रुपये और 1 लाख रुपये वार्षिक है। ये दोनों योजनाएं वरिष्ठ माध्यमिक और आईटीआई कार्यक्रमों से लेकर स्नातकोत्तर और व्यावसायिक डिग्री तक के पाठ्यक्रमों को कवर करती हैं।
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