अंबाला. पहाड़ी क्षेत्रों में हुई बारिश ने एक बार फिर अंबाला के टांगरी नदी किनारे रहने वाले हजारों लोगों के जख्म हरे कर दिए हैं. शनिवार दोपहर बाद अचानक टांगरी नदी में 23 हजार क्यूसेक से अधिक पानी पहुंचने के बाद देखते ही देखते नदी का जलस्तर बढ़ गया और तटवर्ती कॉलोनियों में पानी घुसने लगा है. न्यू टैगोर गार्डन समेत कई इलाकों के घरों में पानी भर चुका है. प्रशासन की ओर से पहले ही अलर्ट जारी कर दिया गया था, इसलिए लोगों ने समय रहते जरूरी सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया था. लोकल 18 की टीम जब टांगरी बांध पर पहुंची तो वहां का हर दृश्य लोगों के दर्द को बयां कर रहा था. कोई अपने कंधे पर गैस सिलेंडर उठाकर पानी के बीच से निकल रहा था तो कोई राशन, कपड़े और बच्चों का सामान बचाने की कोशिश में जुटा था.
और बिगड़ेंगे हालात
सड़क किनारे छोटे-छोटे बच्चों को गोद में लेकर बैठी महिलाएं अपने घरों की ओर टकटकी लगाए देख रही थीं. जिन घरों को उन्होंने वर्षों की मेहनत और बचत से बनाया था, वे देखते ही देखते पानी में डूबते नजर आए. हर चेहरे पर एक ही सवाल था—आखिर यह सिलसिला कब रुकेगा? टांगरी नदी के तेज बहाव को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग भी बांध पर पहुंचते रहे. हालांकि भारी भीड़ के बीच उन परिवारों की बेबसी सबसे ज्यादा दिखाई दे रही थी, जिनके लिए यह कोई दृश्य नहीं, बल्कि जिंदगी का सबसे कठिन दौर है. लोगों को डर है कि यदि पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला जारी रहा तो आने वाले घंटों में हालात और गंभीर हो सकते हैं.
पूरी जिंदगी अस्त-व्यस्त
लोकल 18 से स्थानीय निवासी रेखा ने बताया कि उनके चार छोटे बच्चे हैं और हर बार बारिश के मौसम में यही परेशानी झेलनी पड़ती है. घर में पानी घुसने के बाद अब उन्हें बच्चों को लेकर सुरक्षित स्थान पर जाना पड़ रहा है. हर साल इसी तरह घर छोड़ना पड़ता है, समझ नहीं आता कि बच्चों को लेकर कहां जाएं और कब तक यह परेशानी झेलें. रेखा के मुताबिक, बाढ़ सिर्फ घरों में पानी नहीं भरता, बल्कि गरीब परिवारों की पूरी जिंदगी अस्त-व्यस्त कर देती है. जगदीश कुमार ने कहा कि यह समस्या नई नहीं है. हर मानसून में टांगरी नदी का जलस्तर बढ़ने से लोग घर छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं. कई दिनों तक कामकाज ठप रहता है, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है और परिवारों को सड़कों या ऊंचे स्थानों पर शरण लेनी पड़ती है. अब केवल अस्थायी इंतजाम नहीं, बल्कि इस समस्या का स्थायी समाधान होना चाहिए.
‘कहा गया था कि पानी नहीं घुसेगा’
बृजमोहन कहते हैं कि प्रशासन की सूचना मिलते ही उन्होंने परिवार के साथ मिलकर घर का कीमती सामान ऊंचे स्थान पर पहुंचाना शुरू कर दिया था. पिछले वर्ष बाढ़ से उन्हें करीब ढाई लाख रुपये का नुकसान हुआ था. इस बार भी वही डर उनके सामने खड़ा है. प्रशासन ने भरोसा दिया था कि दोनों तरफ मजबूत बांध बनने के बाद कॉलोनियों में पानी नहीं घुसेगा, लेकिन इस बार भी घरों में पानी भर गया. अब उन्हें चिंता है कि इस बार फिर कितना नुकसान होगा. स्थानीय पार्षद हरमिंदर हीरा ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों से लगभग 23 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने की सूचना मिलते ही उन्होंने क्षेत्र के लोगों को अलर्ट कर दिया था. लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और जरूरी सहायता उपलब्ध कराने का काम लगातार किया जा रहा है. पहाड़ों में और बारिश होती है तो जलस्तर और बढ़ सकता है, इसलिए प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है.
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