Tahir Hussain News (द भारत ख़बर), नई दिल्ली: उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान IB ऑफिसर अंकित शर्मा की हत्या मामले में दोषी करार दिए गए पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन सहित 5 दोषियों को शुक्रवार को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। ड्यूटी पर तैनात खुफिया विभाग के एक होनहार अधिकारी की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी। हत्या भी इतने क्रूर तरीके सी की गई थी कि अदालत ने इसे जघन्य अपराध बताया। आइए जानते हैं कि अंकित शर्मा कौन थे और किन परिस्थितियों में उनकी हत्या की गई।
कब हुई थी अंकित की हत्या?
अंकित 25 फरवरी 2020 को घर का सामान लेने के लिए चांद बाग स्थित अपने घर से निकले और लापता हो गए। उनके परिजनों ने उस दिन उन्हें बहुत ढूंढा, लेकिन उनका कहीं पता नहीं चला। दरअसल, फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के समर्थकों और विरोधियों के बीच तनाव के बाद भयंकर सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे। इन हिंसक झड़पों में 53 लोगों की जान चली गई थी और सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इसी दौरान अंकित की भी हत्या दंगाइयों ने कर दी थी।
कैसे की गई अंकित की हत्या?
पुलिस के मुताबिक एक हिंसक भीड़ उन्हें खींचकर ले गई और बेरहमी से उनकी हत्या कर दी। उनकी लाश को एक नाले में फेंक दिया गया। अंकित शर्मा को 51 बार चाकू मारा गया था। पुलिस ने अगली सुबह नाले से उनका शव बरामद किया था। अंकित के पिता रविंदर कुमार की शिकायत पर 26 फरवरी 2020 को FIR दर्ज की गई थी। अंकित के पिता ने आरोप लगाया था कि ताहिर हुसैन की इमारत से दंगा फैल रहे दंगाइयों ने अंकित पर हमला किया था।
कैसे फंसे ताहिर हुसैन?
दिल्ली पुलिस की जांच के मुताबिक ताहिर हुसैन का मकान हिंसा के दौरान कथित तौर पर दंगाइयों का मुख्य ठिकाना बना हुआ था। जांच में पुलिस ने कई आधार पेश किए।
पिता का FIR
अंकित शर्मा के पिता रविंदर कुमार ने FIR में आरोप लगाया कि ताहिर हुसैन के मकान से लगातार पत्थर, पेट्रोल बम और गोलीबारी हो रही थी और उसी हिंसा के दौरान उनके बेटे की हत्या हुई।
प्रत्यक्षदर्शियों के बयान
पुलिस ने कई चश्मदीद गवाहों के बयान दर्ज किए जिन्होंने दावा किया कि ताहिर हुसैन घटनास्थल पर मौजूद थे और भीड़ का नेतृत्व या उसे उकसा रहे थे. इन बयानों को अभियोजन पक्ष ने सुनवाई के दौरान अदालत में पेश किया।
फॉरेंसिक और घटनास्थल
पुलिस ने ताहिर हुसैन की इमारत की छत से बड़ी मात्रा में पत्थर, पेट्रोल बम बनाने की सामग्री, एसिड के पैकेट, गुलेल और अन्य वस्तुएं मिलने का दावा किया। अभियोजन पक्ष ने इसे हिंसा के लिए पहले से की गई तैयारी का संकेत बताया।
कॉल रिकॉर्ड
जांच एजेंसियों ने सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड), मोबाइल लोकेशन और अन्य डिजिटल सबूत भी अदालत में पेश किए, जन्हें अभियोजन पक्ष ने साजिश और घटनास्थल पर उपस्थिति से जोड़ा।

