Datia Bypoll Result 2026: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर हुए बहुचर्चित उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को कांग्रेस के घनश्याम सिंह के हाथों 6016 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार आशुतोष तिवारी को कुल 60,761 वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने 66,757 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। यह मुकाबला शुरुआत से ही बेहद रोमांचक रहा। शुरुआती मतगणना में आशुतोष तिवारी बढ़त बनाए हुए थे, लेकिन जैसे-जैसे वोटों की गिनती आगे बढ़ी, चुनावी तस्वीर पूरी तरह बदल गई और कांग्रेस उम्मीदवार ने निर्णायक बढ़त हासिल कर ली।
दतिया उपचुनाव पूरे मध्य प्रदेश की सबसे चर्चित सीटों में से एक था। इसकी सबसे बड़ी वजह यह रही कि बीजेपी ने इस सीट से अपने वरिष्ठ नेता और प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था। टिकट बदलने के फैसले के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और गुटबाजी की खबरें भी सामने आई थीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर उभरी नाराजगी, संगठन के भीतर मतभेद और कांग्रेस की प्रभावी चुनावी रणनीति ने बीजेपी के प्रदर्शन को प्रभावित किया। ऐसे में इस हार को केवल एक चुनावी परिणाम नहीं, बल्कि बीजेपी के लिए एक अहम राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। दतिया सीट पर मिली इस हार के बाद आशुतोष तिवारी एक बार फिर चर्चा में हैं। चुनावी मैदान में उनकी हार के साथ-साथ अब लोगों की दिलचस्पी उनके राजनीतिक सफर, शिक्षा, पारिवारिक पृष्ठभूमि, पेशे और कुल संपत्ति के बारे में जानने में भी बढ़ गई है।
कौन हैं आशुतोष तिवारी?
आशुतोष तिवारी भारतीय जनता पार्टी के सीनियर नेताओं में गिने जाते हैं और लंबे समय से मध्य प्रदेश बीजेपी में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। वे दतिया जिले से आते हैं और संगठन में उनकी पहचान एक जमीनी कार्यकर्ता तथा कुशल रणनीतिकार की रही है। उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड का अध्यक्ष भी बनाया गया था, जिसके बाद उनका राजनीतिक कद और बढ़ा। संगठन में उनकी सक्रियता और प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए बीजेपी ने दतिया उपचुनाव में उन्हें उम्मीदवार बनाया। उनके समर्थन में बीजेपी के कई बड़े नेताओं ने प्रचार भी किया था।
किस वजह से चर्चाओं में आए?
दतिया उपचुनाव में आशुतोष तिवारी की उम्मीदवारी इसलिए भी चर्चा में रही, क्योंकि बीजेपी ने इस सीट से अपने दिग्गज नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर उन पर भरोसा जताया। यह फैसला पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश माना गया। आशुतोष तिवारी को अपेक्षाकृत नई पीढ़ी के चेहरे के रूप में पेश करते हुए बीजेपी ने स्थानीय नेतृत्व और संगठन को प्राथमिकता देने का संकेत दिया। उम्मीदवार घोषित होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने दतिया में रोड शो और जनसभाएं कर उनके पक्ष में प्रचार किया।
कितने पढ़े-लिखे हैं आशुतोष?
चुनावी हलफनामे के अनुसार बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी पोस्ट ग्रेजुएट हैं। उन्होंने 2011 में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय कैंपस, झांसी से राजनीति विज्ञान में MA की डिग्री प्राप्त की थी। पेशे के तौर पर उन्होंने खुद को कृषक और शिक्षाविद बताया है। उनके खिलाफ किसी भी प्रकार का आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। संपत्ति की बात करें तो चुनाव आयोग में दाखिल शपथपत्र के मुताबिक आशुतोष तिवारी ने करीब 3.76 करोड़ रुपये की कुल चल-अचल संपत्ति घोषित की है। उन पर करीब 39.69 लाख रुपये की देनदारियां भी दर्ज हैं। उनके शपथपत्र में कृषि भूमि, आवासीय संपत्ति, बैंक जमा, निवेश और अन्य परिसंपत्तियों का भी जिक्र है।
BJP ने क्यों काटा नरोत्तम मिश्रा का टिकट?
बीजेपी ने दतिया उपचुनाव में पूर्व गृह मंत्री और 6 बार के विधायक नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था। पार्टी ने इस फैसले के पीछे कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में दतिया सीट से कांग्रेस के राजेंद्र भारती के हाथों मिली हार के बाद बीजेपी स्थानीय स्तर पर नया चेहरा उतारकर एंटी-इंकम्बेंसी और संगठनात्मक समीकरणों को साधना चाहती थी। पार्टी नेतृत्व ने अपेक्षाकृत युवा और संगठन से जुड़े चेहरे पर भरोसा जताते हुए बदलाव का संदेश दिया।
टिकट कटने के बाद हुआ था बवाल
नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद दतिया में बीजेपी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया। नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया, झांसी-ग्वालियर हाईवे पर जाम लगाया और कई स्थानों पर पुलिस के साथ झड़प की स्थिति बन गई। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। विरोध के बीच बीजेपी के कई स्थानीय पदाधिकारियों ने भी अपने पदों से इस्तीफा दे दिया, जिससे यह मामला प्रदेश की राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गया। हालांकि कुछ दिनों बाद पार्टी नेतृत्व ने डैमेज कंट्रोल शुरू किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने नरोत्तम मिश्रा से मुलाकात की। इसके बाद मिश्रा ने सार्वजनिक रूप से अपने समर्थकों से शांत रहने और पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार आशुतोष तिवारी का समर्थन करने की अपील की। वे स्वयं आशुतोष तिवारी के नामांकन में भी शामिल हुए और भावुक होते हुए कहा कि उनके लिए पार्टी सर्वोपरि है।

