अंबाला. सावन का महीना आते ही शिवालयों में “हर-हर महादेव” के जयघोष गूंजने लगते हैं. हर सोमवार भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगती हैं. अंबाला शहर में एक ऐसा शिव मंदिर है, जहां सिर्फ आस्था ही नहीं, बल्कि सदियों पुराना इतिहास भी लोगों को अपनी ओर खींचता है. अंबाला शहर का प्राचीन विश्वनाथ शिव मंदिर इन दिनों सावन के कारण श्रद्धालुओं से गुलजार है. मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने इसी स्थान पर भगवान शिव की आराधना की थी और यहां स्थापित शिवलिंग उसी काल का है. यही वजह है कि इस मंदिर को अंबाला के सबसे प्राचीन और चमत्कारी शिवालयों में गिना जाता है. लगभग 550 वर्ष पुराने इस मंदिर की पहचान केवल धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी ऐतिहासिक बनावट, चूने से निर्मित दीवारें और उन पर बनी प्राचीन चित्रकलाएं इसे विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनाती हैं. मंदिर परिसर में मौजूद प्राचीन कुआं और तालाब आज भी बीते समय की कहानी बयां करते हैं.
अटूट आस्था का केंद्र
लोकल 18 से मंदिर के पुजारी पंकज बताते हैं कि उनका परिवार 400 वर्षों से इस मंदिर में सेवा करता चला आ रहा है. उनके बुजुर्ग बताते थे कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने यहां भगवान शिव की तपस्या की थी और उसी समय इस शिवलिंग की स्थापना की गई थी, तभी से यह स्थान शिव भक्तों की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है. समय बीतने के साथ कश्मीर के दीवान कृष्ण ने मंदिर का पुनर्निर्माण कराया, जिसके बाद यह मंदिर आज भी अपनी मूल भव्यता के साथ खड़ा है. इस मंदिर के अंदर बनी दुर्लभ चित्रकलाएं और दीवारों पर उकेरे गए रहस्यमयी चित्र आज भी लोगों को आकर्षित करते हैं.
दूसरे शिवालयों से अलग
पुजारी पंकज के अनुसार, इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित अर्धनारीश्वर स्वरूप का शिवलिंग है. शिवलिंग पर भगवान शिव और माता पार्वती के संयुक्त स्वरूप के दर्शन होते हैं. शिवलिंग पर निरंतर बहने वाली जलधारा को श्रद्धालु माता अलकनंदा की पवित्र धारा का प्रतीक मानते हैं. यही विशेषता इस मंदिर को दूसरे शिवालयों से अलग पहचान दिलाती है. सावन के महीने में मंदिर की रौनक कई गुना बढ़ जाती है. हर सोमवार तड़के से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है. पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से बड़ी संख्या में भक्त यहां जलाभिषेक करने और भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं.
धार्मिक महत्व के साथ यह मंदिर सामाजिक और ऐतिहासिक रूप से भी खास पहचान रखता है. हरियाणा के पूर्व राज्यपाल बीएन चक्रवर्ती और पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल भी यहां दर्शन कर चुके हैं. कई जनप्रतिनिधि और समाज के प्रमुख लोग वर्षों से यहां माथा टेकने आते रहे हैं.
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