
नाओएरो इक्कीसवीं सदी में ऐसा आठवां देश बन गया है जिसने अपना नाम बदला, इससे पहले तुर्किये ने 2022 में ऐसा किया था
Nauru Name Change, (द भारत ख़बर), यारेन: नौरू ने अपना नाम बदलकर आधिकारिक तौर पर ‘रिपब्लिक आॅफ नाओएरो’ कर लिया है। राष्ट्रपति डेविड अडांग ने इस बदलाव की पुष्टि की है जिसे संयुक्त राष्ट्र रिकॉर्ड्स में भी लागू कर दिया गया है। यह बदलाव औपनिवेशिक प्रभाव को खत्म करने और अपनी पारंपरिक भाषा व पहचान को सम्मान देने के लिए किया गया है।
नौरू मध्य प्रशांत महासागर में स्थित दुनिया का तीसरा सबसे छोटा देश है जिसका क्षेत्रफल मात्र 21 वर्ग किलोमीटर और जनसंख्या लगभग 12,000 है। इस द्वीपीय देश का कहना है कि ‘नाओएरो’ उसका असली नाम है, जबकि ‘नौरू’ विदेशी लोगों की सुविधा के लिए प्रचलन में आया था। अब सरकार का मानना है कि समय आ गया है कि देश दुनिया के सामने अपनी मूल पहचान के साथ जाना जाए।
19वीं सदी के आखिर तक मछली पकड़ने, नारियल की खेती और समुद्र से मिलने वाले संसाधनों पर निर्भर था देश
19वीं सदी के आखिर तक नाउरू एक छोटा-सा द्वीप था, जहां 12 स्थानीय जनजातियां रहती थीं। यहां कोई आधुनिक सरकार या सेना नहीं थी। लोगों का जीवन मछली पकड़ने, नारियल की खेती और समुद्र से मिलने वाले संसाधनों पर निर्भर था। 1870 के दशक में यूरोपीय व्यापारी नाउरू पहुंचने लगे। वे यहां नारियल और दूसरे सामान का व्यापार करते थे। बदले में उन्होंने स्थानीय लोगों को शराब और बंदूकें बेचना शुरू कर दिया। इससे द्वीप का सामाजिक संतुलन बिगड़ने लगा।
10 साल तक चला गृहयुद्ध
1878 में एक शादी समारोह के दौरान रीति-रिवाज को लेकर बहस हुई। बहस के बीच एक व्यक्ति ने पिस्तौल निकालकर गोली चला दी, जिससे एक कबीलाई प्रमुख के बेटे की मौत हो गई। नाउरू की पारंपरिक संस्कृति में ऐसी हत्या का बदला लेना सामाजिक जिम्मेदारी माना जाता था। यहीं से बदले का सिलसिला शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे पूरे द्वीप के 12 कबीलों के बीच गृहयुद्ध में बदल गया।
1888 में जर्मनी ने हस्तक्षेप कर द्वीप पर नियंत्रण स्थापित किया
यह संघर्ष करीब 10 साल तक चला, जिसे नाउरू सिविल वॉर के नाम से जाना जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मारे गए, कई गांव उजड़ गए और लगभग हर परिवार किसी न किसी रूप में इस हिंसा से प्रभावित हुआ। हालात इतने खराब हो गए कि आखिरकार 1888 में जर्मनी ने हस्तक्षेप कर द्वीप पर नियंत्रण स्थापित किया, हथियार जब्त किए और इस लंबे खूनी संघर्ष को समाप्त कराया।
जर्मनी के बाद आॅस्ट्रेलिया ने नौरू पर कब्जा किया
1914 में प्रथम विश्व युद्ध शुरू होते ही हालात बदल गए। आॅस्ट्रेलियाई सेना ने बिना ज्यादा प्रतिरोध के नाओएरो पर कब्जा कर लिया। युद्ध खत्म होने के बाद जर्मनी हार गया और उसे अपने कई विदेशी उपनिवेश छोड़ने पड़े। करीब पांच दशक तक विदेशी सरकार के कब्जे में रहने के बाद नाओएरो को 31 जनवरी 1968 को पूर्ण स्वतंत्रता मिली और यह एक संप्रभु गणराज्य बन गया।
ये भी पढ़ें: कार में मौत का मतलब हमेशा ‘एक्सीडेंट’: सुप्रीम कोर्ट
