फरीदाबाद: 4 सितंबर को जन्माष्टमी है ऐसे में फरीदाबाद में भी इस पर्व को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं. बात करें फरीदाबाद के तिलपत गांव की तो अगर आप जन्माष्टमी के मौके पर वृंदावन और मथुरा नहीं जा पाते हैं तो तिलपत गांव आपके लिए खास जगह हो सकती है. फरीदाबाद से दूर जाने की जरूरत नहीं है क्योंकि यहां बाबा सूरदास मंदिर में वृंदावन और मथुरा जैसी जन्माष्टमी मनाई जाती है. जिस तरीके से वृंदावन, गोकुल और मथुरा में जन्माष्टमी का माहौल रहता है वैसा ही नजारा तिलपत गांव में भी देखने को मिलता है. आपको बता दें कि पांडवों ने जो पांच गांव मांगे थे उनमें से एक गांव तिलपत भी बताया जाता है. यहां जन्माष्टमी की तैयारियां करीब एक सप्ताह पहले ही शुरू हो जाती हैं और पर्व वाले दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. दिल्ली एनसीआर के अलावा अलग-अलग राज्यों से भी लोग भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव देखने के लिए यहां आते हैं.
18 साल से मंदिर में सेवा कर रहे नारायण दास
लोकल 18 से बातचीत में नारायण दास बताते हैं कि मैं यहां बाबा का दास हूं और उनकी सेवा कर रहे हैं. मुझे बाबा सूरदास मंदिर में सेवा करते हुए 18 साल हो चुके हैं. पांडवों ने जो पांच गांव मांगे थे उसमें पांचवा गांव यह तिलपत है. श्री किशोरी शरणजी महाराज बाबा ऐसा बताते थे कि यहां पर पांडव आए थे और उन्होंने यहां हवन भी किया था. पांडवों ने जो पांच गांव मांगे थे उनमें से एक गांव तिलपत आता है. बाबा की बहुत बड़ी कृपा है. तिलपत गांव पहले उजड़ चुका था और फिर बाबा ने ही इसको बहाल किया. उन्होंने कृपा की और आशीर्वाद दिया. बाहर से लोगों को बुलाया गया और उन्हें बसाकर फिर गांव को दोबारा बसाया गया.
देशभर में 35 आश्रम
नारायण दास बताते हैं कि श्री किशोरी शरणजी को सूरदास बाबा कहा जाता था. देशभर में करीबन बाबा के 35 आश्रम बताए जाते हैं. तिलपत में जन्माष्टमी बड़े ही धूमधाम से मनाई जाती है. दिल्ली एनसीआर से तो श्रद्धालु आते ही हैं और अलग राज्यों से भी लोग यहां पहुंचते हैं. करीबन लाखों की संख्या में लोग जन्माष्टमी के दौरान यहां पहुंचते हैं. जिस तरीके से वृंदावन, गोकुल और मथुरा नगर में यह पर्व मनाया जाता है उसी तरह का आयोजन यहां भी किया जाता है. जन्माष्टमी से लेकर राधा अष्टमी तक यहां लगातार कीर्तन चलता है. राधा अष्टमी भी बड़े धूमधाम से मनाई जाती है और इस अवसर पर झांकी निकाली जाती है.
जन्माष्टमीं पर भक्तों की लगती है भारी भीड़
नारायण दास बताते हैं कि वृंदावन में भीड़ के हिसाब से कई बार जगह कम पड़ जाती है लेकिन हमारे यहां कितने ही लोग आ जाएं, बहुत बड़ा स्पेस है. यहां जगह की कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि मंदिर काफी दूर-दूर तक फैला हुआ है. गांव में चारों तरफ जितनी भी जमीन है वह बाबा की ही बताई जाती है. सूरदास मंदिर से बंसी वाले मंदिर तक देखा जाए तो करीब 1 किलोमीटर तक मंदिर के लिए जगह है. ऐसे में जन्माष्टमी पर कितनी भी भीड़ आ जाए, परिसर में श्रद्धालुओं को ज्यादा परेशानी नहीं होती है. मंगलवार को भी यहां श्रद्धालुओं की संख्या काफी ज्यादा रहती है.