कुरुक्षेत्र : हरियाणा के सोनीपत में कुछ महीने पहले हमने कलियुगी बच्चों को देखा था, जो अपने बाप का अंतिम संस्कार करने तक नहीं पहुंचे. वहीं, अब एक ऐसा ही मामला कुरुक्षेत्र से सामने आया है. यहां एक बहन अपने भाई को अस्पताल में ही छोड़कर चली गई और कह दिया कि तुस्सी ही कर दो संस्कार, तवाडी बौत मेहरबानी होवेगी. मेरे पास समा है नी.
मामला कुरुक्षेत्र के एलएनजेपी अस्पताल का है. यहां 71 साल के जुगल किशोर की बीमारी के चलते निधन हो गया. जब उनके घरवालों को जानकारी दी तो उनकी छोटी बहन पुष्पा अस्पताल मिलने पहुंची और फिर अनाथ आश्रम के संचालक से यह कह दिया कि आप ही कर दो संस्कार, आपकी बहुत मेहरबानी होगी. मेरे पास समय नहीं है. मैं रुक नहीं सकती. अगर मैं खुद ठीक होती, तो रुक जाती. फिर वह अपने रिश्तेदार के साथ भाई के शव को अस्पताल में ही छोड़कर चली गई.
यह है मामला
दरअसल, दिल्ली के उत्तम नगर का रहने वाला जुगल किशोर करीब 10 साल से पिहोवा के सरस्वती तीर्थ में रह रहे थे. परिवार में केवल उसकी छोटी बहन पुष्पा ही है, जिससे मिलने के लिए जुगल किशोर अक्सर मिलने जाते रहते थे. उनकी शादी भी नहीं हुई थी. इसके अलावा किस अन्य परिजन का अता-पता नहीं था. दो सप्ताह पहले जुगल किशोर की तबीयत खराब हुई तो बाबा फरीद, जो अनाथ आश्रम के संचालक हैं, वे उन्हें अपने साथ आश्रम ले आए और इलाज कराया. वह कई दिन तक पिहोवा सरकारी अस्पताल में भर्ती रहे. इस दौरान उनकी बहन से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन जब सफलता नहीं मिली तो उसे कुरुक्षेत्र LNJP अस्पताल रेफर कर भर्ती करा दिया.
भाई का शव बिस्तर पर देखा फिर…
4 सितंबर को जुगल की इलाज के दौरान मौत हो गई. भाई की मौत की खबर देने पर जुगल की बहन पुष्पा बड़ी मुश्किल से कुरुक्षेत्र अस्पताल पहुंची. आखिर बार अपने भाई का शव बिस्तर पर ही देखा. तब उन्होंने उससे भाई के संस्कार की बातचीत की. इस पर पुष्पा ने टाइम नहीं होने की बात कहते हुए साफ मना कर दिया. बाबा फरीद ने कहा कि संस्कार भी असी करिए, अस्थियां भी तुसी नी ले जा सकदे. हांजी, हांजी… तुसी ही कर दो संस्कार, तवाडी बौत मेहरबानी होवेगी. मेरे पास समा है नी. मैं रुक नहीं सकदी. जे मैं आप ठीक होंदी , ते रुक जांदी. कुछ देर बाद ही भाई के शव को अस्पताल में ही छोड़कर रिश्तेदार के साथ चली गई.
इसके बाद बाबा निशान सिंह और आश्रम कमेटी ने ही जुगल किशोर का अंतिम संस्कार किया. अस्थि विसर्जन भी आश्रम की ओर से सरस्वती नदी में किया गया. बाबा निशान का कहना था कि बहन-भाई के ऐसे रिश्ते को देख बेहद दुख हुआ.
