Akash Anand Out of BSP: बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह मुक्त करने का ऐलान किया है। यह फैसला ऐसे समय हुआ है, जब उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं। मायावती ने 9 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लंबी पोस्ट के जरिए इस फैसले की वजह बताई। उन्होंने आकाश आनंद के ससुर और BSP के पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के फैसले को ‘देर आए, दुरुस्त आए’ बताया। मायावती ने आरोप लगाया कि सिद्धार्थ ने निजी और पारिवारिक हितों को पार्टी से ऊपर रखा।
पहले पद गया, अब पार्टी से भी हुए अलग
आकाश आनंद के खिलाफ मायावती का यह फैसला अचानक नहीं आया है। 3 सितंबर 2026 को मायावती ने उन्हें BSP के चीफ नेशनल कोऑर्डिनेटर के पद से हटा दिया था। उस समय उन्होंने कहा था कि आकाश को अभी और राजनीतिक परिपक्वता की जरूरत है और उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देना फिलहाल उचित नहीं होगा। यह 2024 के बाद तीसरी बार था, जब आकाश आनंद को पार्टी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से हटाया गया। इसके बाद 7 सितंबर को मायावती ने आकाश आनंद के छोटे भाई ईशान आनंद को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को छोड़कर अन्य राज्यों के लिए चीफ सेक्टर कोऑर्डिनेटर नियुक्त किया। अब 9 सितंबर के बयान में मायावती ने आकाश को पार्टी में किसी जिम्मेदारी से हटाने के बजाय उन्हें पूरी तरह ‘मुक्त’ करने की बात कही है।
1. आज श्री अशोक सिद्धार्थ द्वारा राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा अति-देर से उठाया गया यह सही क़दम है।
2. वैसे लोगों का यही कहना है कि अगर यह फैसला वे काफी पहले ही ले लेते तो बी.एस.पी., बहुजन समाज व बहुजन मूवमेन्ट तथा उनके दामाद श्री आकाश आनन्द को भी लगातार विपरीत परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता और ना ही मुझे विधानसभा आमचुनाव एवं ख़ासकर यूपी में पाँचवीं बार सरकार बनाने की ज़बरदस्त तैयारियों के बीच, पार्टी व मूवमेन्ट के व्यापक हित के मद्देनज़र इनके बारे में कई बार कड़े फैसले लेने आदि की ज़रूरत पड़ती।
3. वैसे यह भी सर्वविदित है कि बहुजन समाज पार्टी की अम्बेडकरवादी राजनीति की परम्परा, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के पदचिन्हों पर चलने वाली ज़बरदस्त त्याग, तपस्या, संघर्ष व कुर्बानी आदि के साथ-साथ सबसे बढ़कर निजी व पारिवारिक स्वार्थ से दूर रहने की विशिष्ठ पहचान की है, जिसे मान्यवर श्री कांशीराम जी की तरह ही मैं भी समर्पित हूँ और जिससे पार्टी के सभी लोगों को ज़रूर सबक़ सीखकर बी.एस.पी. में आगे बढ़ाने के लिये निजी व पारिवारिक स्वार्थ एवं पद आदि की लालसा से ऊपर उठना चाहिये तभी फिर यहाँ सदियों से शोषित, पीड़ित, उपेक्षित व तिरस्कृत ’बहुजन समाज’ ’शासक वर्ग’ बन पायेगा और इस क्रम में हमेशा याद रहे कि जितना महान लक्ष्य, उतनी ही बड़ी कुर्बानी की भी ज़रूरत होती है।
4. कुल मिलाकर, श्री अशोक सिद्धार्थ का राजनीति से संन्यास लेने का फैसला ’देर आये दुरुस्त आये’ की कहावत की तरह ही यह अच्छी बात है।
5. किन्तु श्री अशोक सिद्धार्थ को, अपने दामाद श्री आकाश आनन्द के उज्जवल भविष्य के साथ ही बी.एस.पी. पार्टी व इसके अम्बेडकरवादी बहुजन मूवमेन्ट के व्यापक हित के प्रति थोड़ी भी सही चिन्ता होती, (जो कि उनमें स्वाभाविक तौर पर होनी ही चाहिये), तो वे बिना देरी किये कल फ़ौरन ही राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर देते और जिससे श्री आकाश आनन्द की पार्टी व मूवमेन्ट के प्रति सक्रियता काफी हद तक सुनिश्चित हो सकती थी, किन्तु ऐसा कुछ नहीं होना यह साबित करता है कि श्री अशोक सिद्धार्थ की नीयत में खोट व अभिलाषा कम नहीं हुई है बल्कि अभी तक भी पूरी तरह से बरक़रार है।
6. इतना ही नहीं बल्कि श्री आकाश आनन्द द्वारा भी अपने कैरियर से अधिक अपने ससुर श्री अशोक सिद्धार्थ के प्रति इस हद तक लगाव क़ायम है कि उन्होंने बी.एस.पी प्रमुख के सोशल मीडिया एकाउण्ट ’एक्स’ पर तत्सम्बंधी पोस्ट को रिपोस्ट करना भी उचित नहीं समझा, हालाँकि यह पोस्ट उनके ही सकारातमक व भलाई के लिये था।
7. जबकि इससे पहले वे बी.एस.पी. प्रमुख के ’एक्स’ पर पोस्ट को रिपोस्ट करके अपनी वफादारी का सबूत देने का प्रयास करते रहे हैं। इससे भी यही लगता है कि श्री अशोक सिद्धार्थ व श्री आकाश आनन्द दोनों को पार्टी व मूवमेन्ट की सफलता में कम व अपने निजी व पारिवारिक स्वार्थ का ज़्यादा मोह है, जबकि बी.एस.पी. ने ही इन दोनों को व अन्य अनेकों लोगों को भी फर्श (ज़मीन) से अर्श (आसमान) की बुलन्दी पर पहुँचाया है और जिसके लिये उन सभी लोगों द्वारा बी.एस.पी. व उसके नेतृत्व का जितना भी वे लोग अहसान मानें व शुक्रगुज़ार हों, वह कम ही होगा, ऐसा सभी लोगों का मानना है।
8. ऐसे हालात में श्री आकाश आनन्द को पार्टी व मूवमेन्ट के वास्तविक हित तथा इससे जुड़े अपने कैरियर की भी परवाह कम तथा रिश्ते-नातों आदि का मोह ज़्यादा है तो ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि श्री आकाश आनन्द डबल माइण्ड होकर फिर बी.एस.पी. पार्टी व मूवमेन्ट का भला कैसे कर सकते हैं?
9. इसीलिये पार्टी के लोगों को यही बेहतर लगता है कि उन्हें पहले दिनांक 3 सितम्बर 2026 को जिस प्रकार से पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक के अति-महत्वपूर्ण पद की सभी अहम ज़िम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था, उसी प्रकार अब उन्हें पार्टी में भी आज से पूरी तरह से फ्री (आज़ाद) कर दिया जाये। अतः श्री आकाश आनन्द पार्टी में अब स्वतंत्र रहना चाहते हैं तो वे स्वतंत्र हैं अर्थात ऐेस में अब इनको पार्टी से पूरेतौर से मुक्त कर दिया गया है।
10. अन्त में यही कहना है कि बी.एस.पी के सभी लोगों को, विरोधियों के साम, दाम, दण्ड, भेद आदि सभी प्रकार के हथकण्डों का डट कर सामना करते हुये ख़ासकर यूपी में फिर से पूर्ण बहमत की अपनी ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की ज़बरदस्त क़ानून-व्यवस्था व बेहतरीन विकास वाली आयरन हुकूमत बनाने के संघर्ष में, पूरे जी-जान से अर्थात पूरे तन, मन, धन की लगन से लगे रहें, बस यही लक्ष्य सर्वोपरि है।— Mayawati (@Mayawati) September 10, 2026
मायावती ने अशोक सिद्धार्थ पर भी साधा निशाना
मायावती ने अपनी पोस्ट की शुरुआत अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास के फैसले पर प्रतिक्रिया से की। उन्होंने कहा कि यह फैसला देर से लिया गया, लेकिन सही है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर अशोक सिद्धार्थ ने यह कदम पहले उठा लिया होता तो BSP, बहुजन समाज और बहुजन आंदोलन को लगातार विपरीत परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता। पार्टी के व्यापक हित में उन्हें कई बार कड़े फैसले लेने की जरूरत नहीं पड़ती। मायावती का सीधा आरोप है कि अशोक सिद्धार्थ की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं पार्टी के हितों से टकराती रही हैं। उन्होंने कहा कि सिद्धार्थ के पास पहले भी खुद को सुधारने और पार्टी के हित में राजनीति से अलग होने के कई अवसर थे।
‘निजी और पारिवारिक स्वार्थ से ऊपर उठना होगा’
मायावती ने अपने बयान में BSP की राजनीतिक विचारधारा और संगठनात्मक संस्कृति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पार्टी की राजनीति बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर और मान्यवर कांशीराम के त्याग, संघर्ष और समर्पण की परंपरा से जुड़ी है। बहुजन समाज को राजनीतिक रूप से मजबूत बनाने के लिए नेताओं और कार्यकर्ताओं को पद, निजी हित और पारिवारिक स्वार्थ से ऊपर उठकर काम करना होगा। मायावती ने यह भी कहा कि पार्टी में बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए बड़ी कुर्बानी की जरूरत होती है। उन्होंने अपने बयान में निजी और पारिवारिक हितों को लेकर विशेष तौर पर चेतावनी दी। यह टिप्पणी सीधे तौर पर अशोक सिद्धार्थ और आकाश आनंद से जोड़कर देखी जा रही है।
आकाश आनंद पर भी मायावती ने उठाए सवाल
मायावती ने अपनी पोस्ट में आकाश आनंद को लेकर भी कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर आकाश को वास्तव में BSP और बहुजन आंदोलन के हितों की चिंता है, तो उन्हें अपने राजनीतिक करियर और पार्टी की जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देनी चाहिए। मायावती ने खास तौर पर इस बात का उल्लेख किया कि आकाश ने उनके X अकाउंट पर अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास से संबंधित पोस्ट को रिपोस्ट नहीं किया। मायावती के मुताबिक इससे यह सवाल उठता है कि आकाश पार्टी और आंदोलन के हितों को लेकर किस स्थिति में हैं। उन्होंने इसे आकाश के अपने ससुर के प्रति लगाव और पार्टी के प्रति उनकी प्राथमिकताओं से जोड़ते हुए सवाल खड़े किए।
‘डबल माइंड’ होकर पार्टी का भला कैसे करेंगे?
मायावती ने आकाश आनंद की स्थिति को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर पार्टी के हित और पारिवारिक रिश्तों के बीच टकराव की स्थिति बनी रहती है, तो वह संगठन के लिए प्रभावी ढंग से काम कैसे कर पाएंगे। उन्होंने सवाल किया कि अगर आकाश आनंद पार्टी और बहुजन आंदोलन के वास्तविक हितों से ज्यादा रिश्ते-नातों को महत्व देते हैं, तो वह पार्टी के लिए किस तरह प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं। यही तर्क देते हुए मायावती ने कहा कि आकाश को पहले 3 सितंबर को संगठन के महत्वपूर्ण पद से मुक्त किया गया था और अब उन्हें पार्टी से भी पूरी तरह स्वतंत्र कर दिया गया है। मायावती ने कहा कि अगर अशोक सिद्धार्थ सक्रिय राजनीति से पूरी तरह संन्यास लेते हैं और आकाश आनंद पार्टी में स्वतंत्र रूप से काम कर पाते हैं, तो पार्टी उनकी जिम्मेदारियों को फिर से बहाल करने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर सकती है। उन्होंने इसे पार्टी में मौजूद सामान्य राय के तौर पर पेश किया।

