फरीदाबाद: फरीदाबाद के सोतई गांव में जमीन से जुड़े मामले को लेकर किसानों का धरना 26वें दिन भी जारी है. किसान अपनी मांगों को लेकर दिन-रात धरना स्थल पर बैठे हैं. इसी बीच आज इस मामले की कोर्ट में सुनवाई हुई, जहां किसानों को पता चला कि नगर निगम फरीदाबाद (MCF) ने एक नई एप्लीकेशन दाखिल की है. किसानों का कहना है कि इस एप्लीकेशन के जरिए नगर निगम अपने पहले दिए गए जवाब में बदलाव करना चाहता है. किसानों के मुताबिक, अभी तक नगर निगम की तरफ से मामले से जुड़े दस्तावेज भी कोर्ट में पेश नहीं किए गए हैं. किसानों ने कोर्ट में अपनी बात रखी और जल्द मामले के समाधान की मांग की. अब इस मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी. किसानों का आरोप है कि मामले को बार-बार उलझाने की वजह से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
जेवर एयरपोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहण का मामला
Local18 से बातचीत में एडवोकेट राजकुमार भाटी बताते हैं कि सोतई से जो किसान आए हुए हैं, उनकी जो जमीन है, जेवर एयरपोर्ट के लिए अधिग्रहण की गई है. उस अधिग्रहण से संबंधित इनको कोई मुआवजा नहीं मिला. उस मुआवजे की बाबत यह सारे लोग आए हैं. मुआवजा नहीं मिलने की वजह से किसान धरने पर बैठे हुए हैं.
किसानों ने कोर्ट में रखी अपनी बात
आज कोर्ट में आए हैं, अपनी-अपनी फाइलों में दस्तक की है. पेश हुए हैं. सरकार की पॉलिसी के अनुसार सारे जो किसान 12 सेक्टर कोर्ट में आए हुए हैं, यह सभी जमीन के कागजात हैं. यह जमीन इन किसानों की है. जमीनी रिकॉर्ड में इनका नाम आ रहा है. जो मुआवजा इनको मिलना चाहिए था, वह अभी तक नहीं मिला है. इसलिए सभी लोग परेशान हैं.
जमीन के बढ़े रेट से नुकसान का दावा
जमीनों की रेट जो है, तीन से चार गुना बढ़ चुकी है. मुआवजा जो है, एक गुना उस पर हुआ है, जिससे किसानों को बहुत वित्तीय हानि हो रही है और सही समय पर पैसा ना मिलने से किसानों को भारी नुकसान और भारी रोष है. आज माननीय अदालत में हम लोग पेश हुए हैं. अदालत ने सुनवाई की है. हमें बारीकी से सुना गया है. हमारे पक्ष को ध्यान में रखते हुए स्पीडी ट्रायल करने के लिए कहा गया है.
26वें दिन भी जारी है किसानों का धरना
किसान नेता बबलू हुड्डा बताते हैं कि आज हमारा 26वां दिन है धरने का. कल हमने तय किया था, सबने मिलकर, आज का प्रोटेस्ट सोतई गांव में भी रहेगा और जज साहब के कमरे के बाहर रहेगा. आज जो है, हम भूख हड़ताल के लिए आए थे. वकील साहब ने जो हमें जज साहब से मिलवा दिया. जज साहब से हमारी सारी बात जो है, खुलकर हो गई.
2022 में जमीन अधिग्रहण के बाद मुआवजा नहीं मिलने का दावा
जज साहब से हमने रिक्वेस्ट की कि हमारी जमीन जो एक्वायर की है सरकार ने, वह 2022 में की है. अभी 2026 चल रहा है, 2026 की अब समाप्ति की ओर है. अभी तक हमें मुआवजे का 1 रुपये नहीं मिला. इसका कारण क्या है. वह जो जमीन है, वह जमीन हमारी है. एक भी सिंगल डॉक्यूमेंट ना तो MCF के पास है, ना ही NHAI के पास है.
2022 और 2026 के जमीन के रेट में अंतर का दावा
हमने जज साहब से रिक्वेस्ट किया है कि हमारा जो 2022 का रेट था, आज जो 2026 चल रहा है, 2022 के रेट में और 2026 के रेट में जमीन-आसमान का अंतर है. जब जो हमारी कीमत एक एकड़ की थी, आज वह 100 गज की है. दूसरी तरफ से ना तो कोई गवाह है, ना कोई सबूत है. दूसरी तरफ से कोई सबूत ही नहीं है, तो यह तो साफ है कि इसका मालिक किसान ही है.
किसानों का कहना मुआवजा मिलने तक जारी रहेगा धरना
किसान कैलाश बताते हैं कि मैं भी सोतई गांव से हूं. आज हमारे गांव के सभी किसान आए हुए हैं. पिछले 26 दिनों से हम लोग धरने पर बैठे हुए हैं और रोज कोर्ट के धक्के काट रहे हैं. सभी लोग, बड़े-बूढ़े, सभी कोर्ट के धक्के काट रहे हैं. जबकि हमारे खुद की जमीन है, हम अपना हक मांग रहे हैं.
हम तो यहां पर भूख हड़ताल के लिए आए थे. फिर जज साहब ने बोला है कि हम जल्दी इसका समाधान कर देंगे, नहीं तो समाधान नहीं हुआ तो फिर हम भूख हड़ताल करेंगे. धरना गांव में शांतिपूर्ण तरीके से चलता रहेगा. जज साहब ने भी बोला है कि तारीख हमारी जल्दी-जल्दी ले लेंगे.
धरना इसलिए चल रहा है, क्योंकि हमारे साथ धोखा हुआ है. यह धरना कंटिन्यू चलता रहेगा. जब तक हमें मुआवजा नहीं मिलेगा और सरकार हमारा कहना नहीं मानेगी.

