
Maharashtra Minister Babasaheb Patil News: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने महाराष्ट्र के मंत्री और NCP नेता बाबासाहेब पाटिल को लातूर जिला केंद्रीय सहकारी बैंक (Latur DCC Bank) के निदेशक पद से हटाने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई सहकारी बैंकों के निदेशकों के लिए तय किए गए 10 साल के कार्यकाल की सीमा का उल्लंघन करने के आरोप में की गई है। बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश और नोटिस के बाद 8 में से 7 निदेशकों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया, लेकिन मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया। इसके बाद आरबीआई ने उनके निष्कासन का आदेश जारी किया।
इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई की नींव तब पड़ी, जब बैंक के सदस्य सतीश शेषा राव जाधव ने आरबीआई के पास एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। जाधव ने अपनी शिकायत में उजागर किया कि राज्य के वरिष्ठ मंत्रियों सहित कई निदेशक बैंक बोर्ड में निरंतर सेवा की कानूनी सीमा को पार कर चुके हैं। कार्यकाल के उल्लंघन के अलावा, मूल याचिकाकर्ता ने बैंक में अवैध भर्तियों को रद्द करने और उसके कामकाज की देखरेख के लिए एक प्रशासक की तत्काल नियुक्ति की भी मांग की थी। इस शिकायत के बाद यह मामला सुर्खियों में आया। नियामक स्तर पर देरी को देखते हुए इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत पड़ी, जिसके तहत यह मामला बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच के सामने पहुंचा।
बीती 3 अगस्त को अदालत ने सक्षम प्राधिकारी को 6 सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया। अदालत के हस्तक्षेप और बढ़ते कानूनी दबाव के बाद, आरोपी 8 में से 7 निदेशकों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। हालांकि महाराष्ट्र के मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया और कार्यकाल के प्रावधानों के संबंध में केंद्रीय बैंक को चुनौती दी। उनकी इस जिद के बाद आरबीआई ने बैंकिंग नियमों के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए उन्हें निदेशक पद से हटाने का सीधा कार्यकारी आदेश जारी किया। रिजर्व बैंक के इस फैसले पर असंतोष जताते हुए मंत्री पाटिल ने आदेश को कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण बताया है और उच्च न्यायालय में इसे चुनौती देने की घोषणा की है।
