
नई दिल्ली. गणपति बप्पा के साथ 10 दिन कैसे बीत गए इस बात का बिल्कुल भी पता नहीं चला. अब उनके भक्तों को सबसे मुश्किल घड़ी का सामना करना है. आज गणपति विसर्जन का दिन है और गणेश उत्सव के 10 दिनों का पावन पर्व खत्म होने जा रहा है. शुक्रवार 25 सितंबर को देशभर में श्रद्धालु गणपति बप्पा का विसर्जन कर उन्हें विदाई देंगे. उनकी विदाई के दिन ही देश के कई हिस्से में अनंत चतुर्दशी का पर्व भी मनाया जा रहा है.
गणेश उत्सव 14 सितंबर को शुरू हुआ था और आज 10 दिन के बाद अब इसका समापन होने जा रहा है. आज गणेश जी की मूर्ति का विसर्जन किया जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश विसर्जन के साथ बप्पा अपने धाम कैलाश की ओर वापस लौट जाते हैं. अपने भक्तों को सुख, समृद्धि और शुभता का आशीर्वाद देते हैं. गणेश विसर्जन के बाद अनंत चतुर्दशी मनाया जाता है. इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा का भी विशेष महत्व माना गया है.
चलिए पता करते हैं कि आज गणेश विसर्जन के लिए शुभ मुहूर्त कब का बताया जा रहा है. द्रिक पंचांग के अनुसार, आज गणेश विसर्जन के लिए कई शुभ मुहूर्त बताए गए हैं. सुबह 6:11 बजे से 10:42 बजे तक प्रातः मुहूर्त रहेगा. इसके बाद दोपहर 12:13 बजे से 1:43 बजे तक शुभ मुहूर्त है.जो दिन भर बप्पा को रखना चाहते हैं उनके लिए शाम 4:44 बजे से 6:14 बजे तक भी विसर्जन किया जा सकता है. रात में 9:14 बजे से 10:43 बजे तक लाभ मुहूर्त रहेगा. इसके अलावा रात 12:13 बजे से 26 सितंबर सुबह 4:42 बजे तक शुभ, अमृत और चर मुहूर्त बताया गया है. गणेश विसर्जन की चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर की रात 11:18 बजे शुरू हुई थी और इसका समापन 25 सितंबर की रात 11:06 बजे होगा.
पिछले 10 दिनों से गणपति की सेवा करने वाले भक्तों को आज का दिन बेहद खराब लगता है. अपने प्यारा बप्पा को विदा करते समय लोगों की आखों में आंसू आ जाते हैं. ऐसे में उनसे अगले साल फिर से आने की कामना करते हुए धूमधाम से विदाई करते हैं. जिन जगहों पर मूर्ति बिठाई जाती है उनके लिए खास निर्देश है कि विसर्जन से पहले गणेश जी की अंतिम पूजा करें. उन्हें लाल चंदन, दूर्वा, फूल, फल, मोदक और लड्डू अर्पित करें. इसके बाद जबसे जरूरी कपूर जलाकर भगवान की एक बार फिर से भव्य आरती करें. जाते जाते गणेश जी से पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा मांगें.
पूजा के बाद गणेश जी की प्रतिमा को लाल या पीले कपड़े से सजी चौकी पर रखें. साथ में थोड़े चावल और मोदक की पोटली रखें. श्रद्धालु भगवान जी की मूर्ति को आदर भाव से जहां विसर्जन करने वाले हैं वहां तक लेकर जाएं. रास्ते में ‘गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या’ का जयघोष करें. विसर्जन स्थल पर दोबारा आरती करने के बाद प्रतिमा को श्रद्धापूर्वक जल में विसर्जित करें.
