
HC Rejects Umar Khalid and Sharjeel Imam Bail: दिल्ली दंगों की साजिश के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश और उसमें तय शर्तों से बंधी हुई है और उनमें बदलाव नहीं कर सकती। दोनों आरोपियों ने लंबे समय से जारी हिरासत और ट्रायल में देरी समेत अन्य आधारों पर नए सिरे से जमानत मांगी थी। इससे पहले 4 जुलाई को ट्रायल कोर्ट ने उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। इसके बाद दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था।
हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की बेल?
हाईकोर्ट के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोनों को जमानत से इनकार किए जाने के बाद बदली परिस्थितियों के आधार पर उन्हें राहत दी जा सकती है। अदालत ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के 5 जनवरी 2026 के आदेश में लगाई गई शर्तों को बदल नहीं सकती। हाईकोर्ट ने न्यायिक अनुशासन का हवाला देते हुए कहा कि वह शीर्ष अदालत के आदेश के विपरीत जाकर दोनों को जमानत नहीं दे सकती।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी 2026 को उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। उसी मामले में पांच अन्य आरोपियों गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सभी आरोपियों की भूमिका समान स्तर की नहीं है। खालिद और इमाम के मामले में अदालत ने अभियोजन सामग्री को प्रथमदृष्टया देखते हुए साजिश में योजना, लामबंदी और रणनीतिक दिशा से जुड़ी भूमिका का उल्लेख किया था। सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक फैसले में UAPA की धारा 43D(5) के तहत लागू जमानत संबंधी वैधानिक रोक का भी उल्लेख किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या रास्ता छोड़ा था?
5 जनवरी के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी होने या आदेश की तारीख से एक साल पूरा होने पर, जो भी पहले हो, दोनों जमानत के लिए अपनी प्रार्थना दोबारा रख सकते हैं। यही शर्त मौजूदा मामले में महत्वपूर्ण बन गई। सितंबर 2026 में एक साल की अवधि अभी पूरी नहीं हुई है। ऐसे में हाईकोर्ट ने खुद सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय व्यवस्था में बदलाव करने से इनकार किया।
ट्रायल कोर्ट ने भी नहीं दी थी राहत
दिल्ली हाईकोर्ट जाने से पहले उमर खालिद और शरजील इमाम ने कड़कड़डूमा कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी। 4 जुलाई 2026 को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बजाज ने दोनों की याचिकाएं खारिज कर दी थीं। ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि 5 जनवरी के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद परिस्थितियों में ऐसा कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं हुआ है, जिसके आधार पर दोनों को उस स्तर पर जमानत दी जा सके। अदालत ने खुद को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए बाध्य माना था।
दिल्ली दंगा मामले में क्या हैं आरोप?
उमर खालिद और शरजील इमाम पर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा से जुड़े बड़ी साजिश के मामले में UAPA समेत विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा चल रहा है। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि CAA विरोधी प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में व्यापक साजिश के तहत हिंसा की घटनाओं को अंजाम देने की योजना बनाई गई थी। फरवरी 2020 की उत्तर-पूर्वी दिल्ली हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।
