Ludhiana Digital Arrest Case: लुधियाना के उद्योगपति और वर्धमान ग्रुप के चेयरमैन एसपी ओसवाल से ₹7 करोड़ की ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। ED के जालंधर जोनल ऑफिस ने सोहेल अख्तर उर्फ राजू को कोलकाता से गिरफ्तार किया है। एजेंसी के मुताबिक यह गिरफ्तारी 28 सितंबर 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत की गई। आरोपी को अदालत ने सात दिन की ED हिरासत में भेजा है।
यह मामला अगस्त 2023 में सामने आए उस साइबर फ्रॉड से जुड़ा है, जिसमें ठगों ने CBI अधिकारी बनने का नाटक किया और एसपी ओसवाल को डिजिटल अरेस्ट किया। इस दौरान उनसे करीब ₹7 करोड़ की रकम ट्रांसफर कराई। ED ने लुधियाना साइबर क्राइम पुलिस की FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। जांच में इसी नेटवर्क से जुड़े अन्य साइबर अपराध के मामले भी शामिल किए गए हैं।
कोलकाता में छापेमारी के बाद गिरफ्तारी
ED के मुताबिक सोहेल अख्तर को कोलकाता में की गई कार्रवाई के बाद गिरफ्तार किया गया। उसे संबंधित अदालत के समक्ष पेश किया गया, जिसके बाद जालंधर लाकर PMLA से जुड़े मामले में आगे की कार्रवाई की गई। जालंधर की अदालत ने अख्तर को ED की हिरासत में भेजा है। एजेंसी अब उससे साइबर अपराध नेटवर्क में उसकी भूमिका, बैंक खातों के संचालन और पैसों के लेनदेन से जुड़े नेटवर्क के बारे में पूछताछ कर रही है।
CBI अधिकारी बनकर किया था फ्रॉड
ED की जांच के अनुसार साइबर ठगों ने CBI अधिकारियों का रूप धारण करके एसपी ओसवाल को डराया और उन्हें डिजिटल अरेस्ट के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। जांच एजेंसी के मुताबिक इस दौरान करीब ₹7 करोड़ की रकम ठगी गई। ED ने बताया कि जांच की शुरुआत लुधियाना साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR से हुई। बाद में इसी नेटवर्क से जुड़े कई अन्य डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड मामलों को भी जांच में शामिल किया गया।
विदेशी नेटवर्क से भी जुड़े फ्रॉड के तार
ED के मुताबिक इस फ्रॉड नेटवर्क में भारत के अलावा नेपाल, कंबोडिया और वियतनाम से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। एजेंसी का आरोप है कि कुछ आरोपियों ने विदेशी सहयोगियों को म्यूल बैंक खातों की जानकारी उपलब्ध कराई और बदले में क्रिप्टोकरेंसी के रूप में कमीशन हासिल किया। जांच में बाइनेंस खातों और USDT जैसे वर्चुअल डिजिटल एसेट्स के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया गया है। ED के अनुसार अर्पित राठौर पर भी विदेशी सहयोगियों को म्यूल खाते उपलब्ध कराने और क्रिप्टोकरेंसी में कमीशन लेने का आरोप है।

