Stock Market News: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान पर खुले और शुरुआती कारोबार में निवेशकों को बड़ा झटका लगा। सेंसेक्स 536 अंक से ज्यादा टूटकर 72,583 के स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी में करीब 200 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर भारतीय रुपये की कीमत भी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुई और यह 94.98 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले से पहले निवेशकों की सतर्कता का असर बाजार पर दिखाई दिया।
सेंसेक्स और निफ्टी में आई गिरावट
सोमवार को शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 536 अंक गिरकर 72,583 पर पहुंच गया। वहीं, एनएसई निफ्टी 200 अंक टूटकर 22,402 के स्तर पर आ गया। बाजार में गिरावट से निवेशकों के बीच चिंता बढ़ी और कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। वैश्विक बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेतों ने भी घरेलू शेयर बाजार पर दबाव बनाया। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंता बनी हुई है। इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी नीतिगत बैठक से पहले निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। इन कारणों से बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा है।
इन बड़ी कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट
सेंसेक्स में शामिल कई प्रमुख कंपनियों के शेयर शुरुआती कारोबार में कमजोर रहे। एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस, हिंदुस्तान यूनिलीवर, इन्फोसिस, बजाज फिनसर्व और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इन कंपनियों के शेयरों में बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाया। दूसरी ओर कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा, अदाणी पोर्ट्स और एक्सिस बैंक के शेयरों में बढ़त देखने को मिली। इससे साफ है कि बाजार में सभी कंपनियों के शेयर एक जैसी दिशा में नहीं चल रहे थे। कुछ शेयरों में खरीदारी जारी रही, जबकि कई बड़ी कंपनियों में निवेशकों ने बिकवाली की।
रुपया डॉलर के मुकाबले 94.98 पर पहुंचा
शेयर बाजार में गिरावट के साथ भारतीय रुपये पर भी दबाव देखने को मिला। सोमवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पांच पैसे कमजोर होकर 94.98 पर पहुंच गया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 94.92 प्रति डॉलर पर खुला था, लेकिन बाद में गिरकर 94.98 पर आ गया। इससे पहले शुक्रवार को रुपया 12 पैसे कमजोर होकर 94.93 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं। इसका असर रुपये पर भी पड़ रहा है।
कच्चे तेल की कीमतें बनीं चिंता का कारण
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई हैं। सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 114 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बताई गई। हालांकि अलग-अलग समय पर इसके भाव में बदलाव हुआ और कारोबार के दौरान कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहा। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ सकता है। इससे रुपये पर दबाव पड़ने और महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है। परिवहन और उत्पादन की लागत बढ़ने से कंपनियों के मुनाफे पर भी असर पड़ सकता है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका भी बाजार की चिंता बढ़ा रही है।

