भारत में अलग-अलग क्षेत्रों में अपना लोहा मनवाने वाला अडाणी समूह एयलाइन इंडस्ट्री में भी उतरने पर विचार कर रहा है। अगर ऐसा होता है, तो इंडिगो और एयर इंडिया के दबदबे वाले विमानन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा का स्वरूप बदल सकता है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मामले की जानकारी रखने वाले दो सूत्रों ने यह जानकारी दी है।
बदलती रणनीति का संकेत
बंदरगाह से लेकर सीमेंट कंपनियों का संचालन करने वाले समूह के इस कदम को कंपनी की बदलती रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। अडाणी समूह भारत में आठ हवाईअड्डों का संचालन करती है, जिनमें से दो मुंबई में हैं। कंपनी 11 अरब डॉलर की विस्तार रणनीति पर काम कर रही है। हालांकि, उसने पहले विमानन इंडस्ट्री में उतरने से की बात को नकार दिया था।
‘देश को एक और एयरलाइन की जरूरत’
एक सूत्र ने अपनी पहचान सार्वजनिक न करने की शर्त पर बताया कि एयरलाइन इंडस्ट्री में उतरने के बारे में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। ग्रुप इस पर अभी विचार रहा है, क्योंकि यह एक जोखिमभरा कारोबार है जिसमें पैसा बनाना आसान नहीं है। सूत्र ने बताया, ”यह एक मुश्किलभरा कारोबार है, लेकिन अडाणी समूह राष्ट्रहित में इसमें उतरना चाहता है। सरकार ने इस बात की ओर इशारा किया था कि एयर इंडिया मुश्किलों से जूझ रही है और इंडिगो के संकट में आने का मतलब है कि देश को एक और अहम विमानन कंपनी की जरूरत है।”
बातचीत शुरुआती चरण में
गुरुवार को अडाणी इंटरप्राइजेज के शेयरों में 3% से ज्यादा की गिरावट देखी गई। एयरलाइन कंपनी लाने को लेकर कंपनी के अंदर हो रही बातचीत शुरुआती चरण में है और इसपर फैसला लेने के लिए कोई टाइमलाइन तय नहीं किया गया है।
होगा सबसे साहसी निर्णय
गौतम अडाणी एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति हैं, जिनकी कुल संपत्ति लगभग 89 अरब डॉलर की है। अगर वे एयरलाइन बिजनेस में आते हैं, तो अपने कैरियर में यह उनका अब तक का सबसे साहसी निर्णय होगा।
नहीं टिक पाईं कई कंपनियां
गौरतलब है कि भारी-भरकम टैक्स, भारी प्रतिस्पर्धा और सप्लाई-चेन में गड़बड़ी की वजह से बीते 15 वर्षों में भारत में किंगफिशर, जेट एयरवेज और गो फर्स्ट जैसी एयरलाइनें बंद हो चुकी हैं।

