
Cyclone Arnab Explained: बंगाल की खाड़ी में बने मौसम तंत्र ने पूर्वी और मध्य भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश का दौर तेज कर दिया है। इसे ‘साइक्लोन अर्नब’ कहा जा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार यह पहले डीप डिप्रेशन के रूप में तट की ओर बढ़ा और आंध्र प्रदेश-ओडिशा तट को पार करने के बाद कमजोर होकर डिप्रेशन में बदल गया। अब यह सिस्टम उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ रहा है। IMD के अनुसार 25 सितंबर की शाम यह उत्तरी छत्तीसगढ़ के पास था और 26 सितंबर तक दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ गया। इसके बाद इसके कमजोर होकर लो-प्रेशर सिस्टम में बदलने का अनुमान है।
‘अर्नब’ नाम क्यों चर्चा में आया?
अर्नब इस मौजूदा सिस्टम का आधिकारिक नाम नहीं है। यह नाम उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र के लिए तय नामों की सूची में अगला नाम है और मौसम प्रणाली के संभावित चक्रवाती तूफान में बदलने की चर्चा के दौरान इसका इस्तेमाल शुरू हुआ था। 23 सितंबर को भी मौसम विभाग के हवाले से साफ किया गया था कि सिस्टम के डीप डिप्रेशन के रूप में तट पार करने की संभावना है, जबकि उसके चक्रवात बनने की संभावना कम थी। इसलिए मौजूदा स्थिति को Cyclone Arnab के बजाय बंगाल की खाड़ी डीप डिप्रेशन के प्रभाव के तौर पर समझना चाहिए।
आंध्र प्रदेश, ओडिशा में क्या हुआ?
डीप डिप्रेशन ने 24 सितंबर के आसपास आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तटीय इलाकों को प्रभावित किया। भारी बारिश, तेज हवाओं, जलभराव और कुछ इलाकों में भूस्खलन के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ। कई इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया और स्कूलों को बंद करना पड़ा। रेल सेवाओं पर भी असर पड़ा। इसके बाद सिस्टम जमीन के ऊपर आगे बढ़ा और इसकी वजह से मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहा।
छत्तीसगढ़ में नदियां उफान पर
छत्तीसगढ़ में पिछले कई दिनों से हो रही भारी बारिश ने कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। नदी-नाले उफान पर हैं और कई सड़कों पर पानी भरने से आवागमन प्रभावित हुआ है। धमतरी के गंगरेल बांध के सभी 14 गेट खोले गए। रुद्री बैराज से करीब 50,000 क्यूसेक पानी महानदी में छोड़ा जा रहा था। कई अन्य जलाशयों का जलस्तर भी काफी बढ़ गया है। कुछ इलाकों में नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है। IMD ने 25 सितंबर को छत्तीसगढ़ में बहुत भारी से अत्यधिक भारी बारिश के लिए रेड अलर्ट जारी किया था।
उत्तर प्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट
डीप डिप्रेशन के उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने के साथ उत्तर प्रदेश में भी बारिश तेज हुई है। 25 और 26 सितंबर को पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए IMD ने अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की थी। 27 सितंबर को भी पूर्वी UP में भारी और पश्चिमी UP में बहुत भारी बारिश का अनुमान है। लखनऊ, बांदा, अयोध्या, बस्ती, चित्रकूट और आसपास के कई इलाकों में भारी बारिश और जलभराव की स्थिति सामने आई है। बांदा में 227 मिमी और लखनऊ में 136 मिमी बारिश दर्ज की गई। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया। भारी बारिश के कारण प्रदेश में कई लोगों की मौत की खबर भी सामने आई है।
किन राज्यों में बारिश का अलर्ट?
IMD के 25-26 सितंबर के पूर्वानुमान के मुताबिक इस मौसम प्रणाली का असर कई राज्यों में देखा जा रहा है। छत्तीसगढ़, ओडिशा, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश, विदर्भ, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और कुछ अन्य क्षेत्रों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग के अनुसार पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश दोनों में 26 सितंबर को अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी थी। 27 सितंबर को भी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। इसके बाद दोनों क्षेत्रों के लिए IMD ने तत्काल अगले दिनों में कोई चेतावनी नहीं दी है।
अब आगे क्या है अनुमान?
फिलहाल मौसम की स्थिति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि डीप डिप्रेशन कमजोर हो रहा है, लेकिन इसके अवशेष और इससे जुड़ी नमी अभी भी कई राज्यों में भारी बारिश करा सकती है। छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में नदी-नालों के बढ़ते जलस्तर तथा निचले इलाकों में जलभराव को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सतर्कता बढ़ाई है। लोगों को नदी, नाले और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की आधिकारिक चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है। खासकर अत्यधिक बारिश वाले इलाकों में अनावश्यक यात्रा से बचना महत्वपूर्ण है।
