लगातार 9वां बजट पेश करने वाली देश की पहली वित्त मंत्री बनेंगी
Union Budget 2026-27 (द भारत ख़बर), नई दिल्ली : संसद में आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश का आम बजट पेश करने जा रहीं है। आज पेश होने वाला देश का बजट कई वजह से काफी खास रहने वाला है। एक तरफ जहां केंद्र सरकार इस साल के बजट को विकसित भारत की तरफ बढ़ने वाला पहला कदम बता रही है। वहीं सरकार के सामने इस बार भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर बनाए रखना, अमेरिकी टैरिफ से पार पाना और बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुसार व्यापार को ढालना प्रमुख चुनौतियां भी मौजूद हैं।
अब देखना होगा की इससे कैसे पार पाया जाता है। वहीं इन सबके बीच सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात यह है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार नौ बार बजट पेश करने वाली देश की पहली वित्त मंत्री बन जाएंगी। हालांकि, पूर्व प्रधानमंत्री और पूर्व वित्त मंत्री मोरारजी देसाई ने 10 बार और पी चिदंबरम ने 9 बार बजट पेश किया, लेकिन दोनों नेताओं ने ही अलग-अलग कार्यकालों में ऐसा किया है। इसलिए भारत के इतिहास में यह पहली बार है जब कोई वित्त मंत्री लगातार नौ बार बजट पेश करेगा।
पहली बार रविवार को पेश होगा बजट
आजादी के बाद से यह पहली बार होगा कि आम बजट रविवार को पेश किया जाएगा। बजट ऐसी चुनौतियों के बीच पेश किया जा रहा है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 50% टैरिफ लगाया है, घरेलू मांग में स्थिरता बनी हुई है और वैश्विक अननिश्चितताएं आगे की राह को धूमिल कर ही हैं। जीएसटी की दरों में कटौती से रकारी राजस्व में कमी आई है, जिससे वित्त बी के पास अर्थव्यवस्था को सहारा देने के कल्प सीमित हो गए हैं।
वित्त मंत्री के सामने ये प्रमुख चुनौतियां
सरकार पर घरेलू स्तर पर उपभोग को बढ़ावा रोजगार सृजन में तेजी लाने और पूंजीगत बढ़ाने का दबाव है। हालांकि, वित्त मंत्री की ओर से आयकर और जीएसटी में भारी कटौती, बुनियादी ढांचे पर खर्च और भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से ब्याज दरों में की गई कटौती से भारतीय अर्थव्यवस्था को अब तक ट्रंप के टैरिफ का सामना करने में मदद मिली है। वित्त मंत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसे उपाय खोजने की होगी, जो इन तमाम बाधाओं के बीच विकास को गति दे सकें।
चुनावी राज्यों पर नजर
खर्च में कटौती की आशंका के बावजूद वित्त मंत्री से खर्च कम करने की उम्मीद नहीं है। चुनाव वाले राज्यों पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और असम के लिए नए उपाय शामिल हो सकते हैं। कुछ योजनाओं को नए रूप में पेश किया जा सकता है। ऐसा करते समय कल्याणकारी व्यय और राजकोषीय विवेक के बीच संतुलन बनाना नाजुक कार्य होगा। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अधिक समर्थन और लक्षित सब्सिडी की मांगों को देखते हुए यह अहम है।

