Bhiwani Swine Flu Cases: हरियाणा में भिवानी जिले में स्वाइन फ्लू के मामले सामने आने लगे हैं। दिन में गर्मी और रात में हल्की ठंड के बीच वायरल बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। जिले में अब तक स्वाइन फ्लू के 12 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। हालांकि राहत की बात यह है कि इनमें से 11 मरीज इलाज के बाद स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं। एक मरीज का अभी हिसार के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है और अस्पतालों में जरूरी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। लोगों से अपील की गई है कि बदलते मौसम में सावधानी बरतें।
21 लोगों के लिए गए सैंपल
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार स्वाइन फ्लू के संदेह में अब तक 21 लोगों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए। इनमें से 12 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई, जबकि 9 लोगों की रिपोर्ट निगेटिव रही। पॉजिटिव पाए गए मरीजों में से दो का इलाज भिवानी में हुआ, जबकि जिले के 10 मरीजों को दूसरे जिलों के अस्पतालों में उपचार मिला। बाहर इलाज करा रहे मरीजों की जानकारी संबंधित अस्पतालों की ओर से भिवानी स्वास्थ्य विभाग को दी गई है। फिलहाल भिवानी के अस्पताल में स्वाइन फ्लू का कोई मरीज भर्ती नहीं है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग संभावित स्थिति से निपटने के लिए लगातार निगरानी कर रहा है।
12 कमरों का अलग वार्ड तैयार
स्वाइन फ्लू के मरीजों की संख्या बढ़ने की स्थिति को देखते हुए भिवानी अस्पताल में अलग वार्ड तैयार किया गया है। इस वार्ड में 12 कमरे हैं और प्रत्येक कमरे में दो मरीजों को रखने की व्यवस्था की गई है। मरीजों की देखभाल के लिए डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की अलग-अलग ड्यूटी लगाई गई है। जरूरत पड़ने पर यहां 24 घंटे चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस वार्ड में डेंगू और चिकनगुनिया के मरीजों को भी भर्ती किया जा सकता है, लेकिन स्वाइन फ्लू के मरीजों को प्राथमिकता दी जाएगी।
खांसी-छींकने से फैलता है संक्रमण
डॉक्टर्स के अनुसार स्वाइन फ्लू का संक्रमण सांस के जरिए फैल सकता है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने के दौरान निकलने वाली बूंदों के संपर्क में आने से दूसरा व्यक्ति संक्रमित हो सकता है। भीड़भाड़ और बंद जगहों पर संक्रमण फैलने का खतरा अधिक रहता है। फ्लू के सामान्य लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में दर्द, सिरदर्द, शरीर में दर्द और कमजोरी शामिल हो सकते हैं। ज्यादातर लोग कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।


