दुकानों से राशन नहीं मिल रहा, कुएं से पानी नहीं दे रहे
Mrityubhoj Panchayat, (द भारत ख़बर), सिरोही: सिरोही के मंडवारिया गांव में एक गरीब परिवार ने आर्थिक तंगी के कारण मृत्युभोज में ‘घी के मालपुए’ बनाने से मना कर दिया। इससे समाज के लोग इतने नाराज हुए कि इनका हुक्का-पानी बंद करने का फरमान सुना दिया। इस गरीब परिवार का समर्थन करने वाले 42 अन्य परिवारों पर भी यही तुगलकी फरमान लागू किया गया।
मंडवारिया गांव के इस पीड़ित परिवार की माली हालत इतनी खराब थी कि वे सम्मानजनक तरीके से अंतिम संस्कार का खर्च भी बमुश्किल जुटा पाए थे। उन्होंने हाथ जोड़कर समाज के सामने सादा भोजन परोसने की मिन्नतें कीं। लेकिन, पंचों की सनक को यह सादगी नागवार गुजरी। उन्हें लगा कि बिना घी के मालपुए के मृत्युभोज होना उनके रुतबे का अपमान है। गुस्साए पंचों ने तुरंत पंचायत बुलाई और तुगलकी फरमान सुना दिया।
मेहमानों के आने और रिश्तेदारी में जाने पर रोक
अब परिवारों को न दुकानदार राशन दे रहा है, न ही कुएं से पानी नहीं भरने दिया जा रहा है। पंचों की बंदिशें यहीं नहीं रुकीं। पीड़ित परिवारों के घरों में मेहमानों के आने और उनके किसी रिश्तेदारी में जाने पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
पंचों के फरमान की अनदेखी करने पर 11 हजार रुपए और पूरे समाज को सामूहिक भोजन (जीमण) का दंड भुगतना होगा। यह पूरा मामला सिरोही के बरलूट थाना इलाके के मंडवारिया गांव का है। पीड़ित परिवारों ने अब जिला कलेक्टर से शिकायत की है।
परिवार की माली हालत ठीक नहीं
पीड़ित परिवारों ने बताया कि गांव में 5 जून को सदाराम पुत्र बलवाजी का निधन हो गया था। 17 जून को हुए मृत्युभोज में परिवार की माली हालत ठीक न होने के कारण घी के मालपुआ नहीं बनाए जा सके। बेहद सादा भोजन कराया गया।
इस बात से समाज के एक दर्जन से अधिक पंच इस कदर नाराज हुए कि उन्होंने अगले ही दिन 18 जून को फरमान सुनाकर इस परिवार सहित कुल 43 समर्थक परिवारों को समाज से बाहर कर दिया।
काम नहीं मिल रहा, बच्चे भूखे सो रहे
बहिष्कार की मार झेल रहे परिवारों का जीना मुश्किल हो गया है। गांव के दुकानदार उन्हें राशन का सामान नहीं दे रहे हैं। खेत मालिक उन्हें मजदूरी पर नहीं रख रहे हैं। हद तो यह है कि इन परिवारों को गांव के सार्वजनिक कुएं से पानी तक भरने नहीं दिया जा रहा है। राशन न मिलने के कारण घरों में बच्चे भूखे सो रहे हैं।
कलेक्टर से लगाई गुहार
पीड़ितों ने 20 जून को बरलूट थाने में नामजद रिपोर्ट दी थी। आरोप है कि पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इससे परेशान होकर गुरुवार को सभी 43 परिवारों के लोग सिरोही कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई। उधर, बरलूट थाने के जांच अधिकारी रमेश कुमार ने कहा, परिवाद हमारे पास आया है। जांच चल रही है। यह मामला कोई पुरानी रंजिश का लग रहा है।
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