Haryana News: हरियाणा में IDFC FIRST Bank से जुड़े करीब 590 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की जांच में केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई को शुरुआती स्तर पर सरकारी सिस्टम में कई गंभीर खामियां मिली हैं। जांच के दौरान 200 से अधिक संदिग्ध और अवैध लेन-देन का खुलासा हुआ है।
बिना अनुमति खुले खाते, नियमों की अनदेखी
सीबीआई की जांच में सामने आया है कि कुछ सरकारी विभागों के बैंक खाते बिना किसी आधिकारिक नोटिंग या सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के ही खोल दिए गए। इतना ही नहीं, कई मामलों में बिना अनुमति के ही इन खातों में सरकारी धन जमा किया गया, जो स्थापित वित्तीय नियमों के खिलाफ है।
इस मामले में हरियाणा सरकार पहले ही दो आईएएस अधिकारियों को निलंबित कर चुकी है, जबकि पांच अन्य आईएएस अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों से हटाकर कम अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं।
छह अधिकारी अभी भी जांच के घेरे में
करीब छह अधिकारी अभी भी सरकार के रडार पर हैं। सीबीआई ने अदालत को बताया है कि धन के दुरुपयोग की पूरी कड़ी अभी सामने आनी बाकी है और जांच जारी है।
डिजिटल सबूतों से खंगाली जा रही कड़ी
जांच एजेंसी डिजिटल डेटा, व्हाट्सएप चैट और अन्य दस्तावेजों की मदद से यह पता लगाने में जुटी है कि घोटाले की राशि किन-किन लोगों तक पहुंची। इस मामले में पांच आरोपितों को न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। एजेंसी को आशंका है कि आरोपी सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं या गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।
फर्जी एफडी और लापरवाही से बढ़ा घोटाला
सीबीआई के अनुसार, दस्तावेजों की सत्यता की ठीक से जांच नहीं की गई और फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के आधार पर लेन-देन होते रहे। अधिकारियों द्वारा आवश्यक ड्यू डिलिजेंस न अपनाने से इस घोटाले को बढ़ावा मिला।
सरकारी अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
हरियाणा वित्त विभाग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद गैर-एम्पेनल्ड बैंकों के माध्यम से सरकारी धन का संचालन किया गया। जांच में उन सरकारी अधिकारियों की पहचान भी की गई है, जिन्होंने चेक और डेबिट नोट्स पर हस्ताक्षर किए थे, जिससे निगरानी तंत्र में गंभीर खामियों के संकेत मिलते हैं।
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