JP Nadda Discharged From AIIMS: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को एंजियोप्लास्टी के बाद बुधवार को दिल्ली के AIIMS से डिस्चार्ज कर दिया गया। कुछ दिन पहले तबीयत खराब होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने जांच के बाद उनके दिल से जुड़ी समस्या का इलाज किया। अब उनकी हालत में सुधार बताया जा रहा है और अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उन्हें घर पर आराम करने की सलाह दी गई है। जेपी नड्डा को 13 अगस्त की शाम बेचैनी महसूस होने के बाद AIIMS दिल्ली लाया गया था। अस्पताल में डॉक्टरों ने उनकी स्थिति की जांच की और जरूरी टेस्ट कराए।
जांच के बाद एंजियोप्लास्टी का फैसला
जेपी नड्डा को एम्स के कार्डियोलॉजी विभाग की निगरानी में रखा गया था। डॉक्टर्स ने जांच के बाद नड्डा की एंजियोप्लास्टी करने का फैसला लिया। 17 अगस्त को उनकी एंजियोप्लास्टी की गई। एंजियोप्लास्टी एक ऐसी मेडिकल प्रक्रिया है, जिसमें दिल तक खून पहुंचाने वाली रक्त वाहिका में आई रुकावट को खोलने की कोशिश की जाती है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद डॉक्टरों ने उनकी लगातार निगरानी की। अस्पताल में रहने के दौरान उनकी सेहत और रिकवरी पर नजर रखी गई, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इलाज के बाद किसी तरह की परेशानी न हो।
Delhi: Union Health Minister J.P. Nadda is being discharged from AIIMS pic.twitter.com/veNGA6u7G6
— IANS (@ians_india) August 19, 2026
एंजियोप्लास्टी के बाद कैसी रही तबीयत?
इलाज के बाद जेपी नड्डा की हालत स्थिर बताई गई। डॉक्टरों की निगरानी में उनकी रिकवरी हुई और स्वास्थ्य में सुधार आने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी देने का फैसला किया गया। AIIMS से छुट्टी मिलने के बाद अब जेपी नड्डा अस्पताल के बजाय घर पर रहकर स्वास्थ्य लाभ करेंगे। डॉक्टरों की सलाह के मुताबिक उन्हें कुछ समय आराम और नियमित मेडिकल फॉलोअप की जरूरत हो सकती है। उनके अस्पताल से बाहर आने की खबर से समर्थकों को राहत मिली है। नड्डा देश के स्वास्थ्य मंत्री होने के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में भी शामिल हैं।
संसद के मानसून सत्र में रहे एक्टिव
एंजियोप्लास्टी से पहले जेपी नड्डा संसद के मानसून सत्र में लगातार सक्रिय नजर आए थे। उन्होंने सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेने के साथ-साथ सरकार से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी भूमिका निभाई। स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विषयों पर भी सरकार का पक्ष रखा। अस्पताल में भर्ती होने से पहले तक उनकी राजनीतिक और संसदीय गतिविधियां जारी थीं। उनके अचानक AIIMS में भर्ती होने के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चिंता देखने को मिली।

