अंबाला: नौकरी के लिए युवा अक्सर डिग्री और प्रतियोगी परीक्षाओं का सहारा लेते हैं, लेकिन अगर किसी के अंदर अभिनय, लेखन या डायरेक्शन का हुनर है तो यही कला कमाई का जरिया भी बन सकती है. दरअसल थिएटर ऐसी ही एक कला है, जिसमें मंच पर अभिनय करने के साथ फिल्म मेकिंग, क्रिएटिव राइटिंग, डायरेक्शन और खुद की एकेडमी शुरू करने तक के रास्ते खुलते हैं. खास बात यह है कि इस क्षेत्र में छोटे स्तर से शुरुआत करके अनुभव के साथ कमाई बढ़ाई जा सकती है.
मंच तक सीमित नहीं रहा थिएटर का दायरा
बता दें कि अंबाला में पिछले करीब चार साल से थिएटर कर रहे थिएटर आर्टिस्ट यश शर्मा बताते हैं कि आज थिएटर का दायरा सिर्फ मंच पर नाटक करने तक सीमित नहीं है. उनके मुताबिक इस कला में रुचि रखने वाला युवा अभिनय के साथ कई दूसरे क्षेत्रों में भी अपना करियर बना सकता है. यश शर्मा मूल रूप से बहादुरगढ़ के रहने वाले हैं और जब उन्होंने थिएटर शुरू किया था, तब उन्हें इस कला की ज्यादा जानकारी नहीं थी. उस समय वह वीडियो एडिटर के तौर पर काम करते थे.
क्रिएटिव राइटिंग और डायरेक्शन में अवसर
वहीं लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए आर्टिस्ट यश शर्मा बताते हैं कि थिएटर से जुड़ने के बाद उनकी क्रिएटिविटी काफी बढ़ी और आगे चलकर उन्हें क्रिएटिव राइटर के रूप में काम करने का मौका मिला. उनका कहना है कि थिएटर से निकलकर युवा डायरेक्शन, फिल्म मेकिंग और राइटिंग जैसे क्षेत्रों में भी आगे बढ़ सकते हैं. यानी अगर किसी युवा में अभिनय या कहानी कहने की क्षमता है तो थिएटर उसके लिए एक तरह से ट्रेनिंग ग्राउंड का काम कर सकता है.
शुरुआत में अनुभव और फिर लाखों की आय
यश शर्मा के अनुसार थिएटर में शुरुआत कुछ हजार रुपये से हो सकती है, जबकि अनुभव और काम बढ़ने के साथ आमदनी लाखों रुपये तक पहुंच सकती है. उनका कहना है कि बड़े शहरों में लगातार 4 से 5 साल प्रैक्टिस करने के बाद अच्छे कलाकार करीब 1 लाख रुपये तक की सैलरी वाले अवसर हासिल कर सकते हैं. वहीं शुरुआती स्तर पर एक कलाकार करीब 30 से 40 हजार रुपये महीने की कमाई का जरिया बना सकता है. हालांकि वास्तविक कमाई काम, अनुभव, शहर और प्रोजेक्ट के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है.
नाटक मंडली और प्रतियोगिताओं से कमाई
उन्होंने बताया कि किसी कार्यक्रम के लिए एक नाटक मंडली को करीब 50 हजार से 1 लाख रुपये तक का भुगतान मिल सकता है. एक टीम में करीब 9 से 10 लोग होते हैं और यह राशि कलाकारों की भूमिका के अनुसार बांटी जाती है. इसके अलावा यूथ फेस्टिवल और प्रतियोगिताओं में कलाकारों को कैश प्राइज के साथ पहचान बनाने का मौका भी मिलता है. यश शर्मा बताते हैं कि वह खुद थिएटर के जरिए अपनी कॉलेज फीस के साथ रहने और खाने का खर्च भी उठा रहे हैं.
एकेडमी और स्कूलों में ट्रेनिंग का विकल्प
यश शर्मा के अनुसार कलाकार अनुभव हासिल करने के बाद बच्चों को थिएटर सिखाने के लिए अपनी छोटी एकेडमी शुरू कर सकते हैं. उनके अनुसार पार्ट टाइम में बच्चों को प्रशिक्षण देकर करीब 30 से 35 हजार रुपये महीने की कमाई का अवसर बनाया जा सकता है. इसके अलावा स्कूलों में आर्टिस्ट शिक्षक या थिएटर ट्रेनर के तौर पर भी काम किया जा सकता है, जहां शुरुआती स्तर पर करीब 20 से 25 हजार रुपये तक की आय का अवसर मिल सकता है.
कड़ी रिहर्सल और समाज को समझने की कला
यश शर्मा का कहना है कि थिएटर सिर्फ कमाई का जरिया नहीं बल्कि समाज को समझने और उसकी वास्तविकता को मंच पर दिखाने की कला भी है. उनके अनुसार आज माता-पिता बच्चों को सिर्फ किताबों तक सीमित रखने की कोशिश करते हैं, जबकि कला बच्चों की क्रिएटिविटी बढ़ाने में मदद करती है. उनका कहना है कि थिएटर से जुड़ने वाले कलाकार को सुबह जल्दी उठकर कई घंटे रिहर्सल करनी पड़ती है और लगातार अभ्यास के साथ ही इस क्षेत्र में पहचान बनाई जा सकती है.
कला को बनाएं बिजनेस आइडिया
आज जब युवा रोजगार के नए विकल्प तलाश रहे हैं, ऐसे में थिएटर को सिर्फ शौक मानने के बजाय करियर और कमाई के क्षेत्र के तौर पर भी देखा जा सकता है. अभिनय से शुरुआत करने वाला युवा अनुभव के साथ राइटिंग, डायरेक्शन, फिल्म मेकिंग, स्कूल ट्रेनिंग या अपनी थिएटर एकेडमी तक पहुंच सकता है. यानी अगर किसी युवा में कला का हुनर है और वह लगातार मेहनत करने को तैयार है तो थिएटर उसके लिए कमाई का एक अलग बिजनेस आइडिया बन सकता है.

