फरीदाबाद. दशहरा का त्योहार आते ही बाजारों में रौनक बढ़ जाती है. कई लोग अपने घरों और मोहल्लों में रावण दहन करने के लिए छोटे-छोटे पुतले खरीदते हैं, लेकिन इन्हीं पुतलों को बनाने वाले कारीगरों के लिए इस बार त्योहार की खुशियां अभी दूर हैं. फरीदाबाद के सेक्टर-18 मोड़ पर सड़क किनारे झुग्गी बनाकर रह रहे कुछ परिवारों ने दिन-रात मेहनत करके रावण के पुतले तैयार किए हैं, लेकिन दशहरे से ठीक पहले तक उनका एक भी पुतला नहीं बिका है. परिवार को अब उम्मीद है कि शायद शाम तक या दशहरे के दिन उनके बनाए पुतलों की बिक्री शुरू हो जाए. लोकल 18 से गुलाब सिंह बताते हैं कि वे मूल रूप से राजस्थान के रहने वाला हैं. काम की तलाश में अलग-अलग शहरों में जाते रहते हैं. रावण के पुतले बनाने के साथ देवी-देवताओं की मूर्तियां बनाने और दूसरे छोटे-मोटे काम भी कर लेते हूं. हर साल करीब 40 से 50 छोटे-बड़े रावण के पुतले तैयार करते हैं. इस बार भी पुतले बनाए हैं, लेकिन अभी तक बिक्री शुरू नहीं हुई है.
500 रुपये से शुरू
गुलाब सिंह ने बताया कि छोटे रावण की कीमत 500 से 600 रुपये तक है, जबकि बड़े पुतलों की कीमत 1,000 से 1,200 रुपये और उससे अधिक भी हो सकती है. जरूरत के हिसाब से 15 से 20 फीट तक के रावण भी बना सकते हैं. इन्हें तैयार करने में बांस, लकड़ी, तार, अखबार, कागज और गत्ते का इस्तेमाल किया जाता है. छोटे पुतले बनाने में एक दिन में आठ से दस पीस तक तैयार कर लेता हूं. इस काम में हाथ बंटाते हैं. कोई कागज लगाने में मदद करता है, तो कोई पुतले को तैयार करने में सहयोग देता है. परिवार के सभी सदस्य मिलकर मेहनत करते हैं, ताकि त्योहार के समय कुछ कमाई हो सके और घर का खर्च चलाया जा सके.
न बिके तब क्या होगा
रामजी लाल कहते कि मैं लंबे समय से फरीदाबाद में रह रहा हूं. पहली बार रावण के पुतले बनाने का काम शुरू किया है. इस काम में परिवार के लोग भी ृजुटे हुए हैं. ढाई-तीन महीने से पुतले बनाने की तैयारी चल रही है, लेकिन अभी तक कोई ग्राहक खरीदारी के लिए नहीं आया है. रामजी लाल के मुताबिक, पांच से छह फीट के छोटे रावण को तैयार करने में करीब 200 से 250 रुपये तक की लागत आ जाती है. बड़े पुतलों को बनाने में इससे ज्यादा खर्च होता है. ऐसे में अगर पुतले नहीं बिके, तो हमारी मेहनत और लागत दोनों पर असर पड़ेगा.