नई दिल्ली. गुरुग्राम में घर खरीदने वालों के लिए एक अजीब स्थिति सामने आ रही है. कागजों पर कई हाउसिंग प्रोजेक्ट रहने के लिए तैयार घोषित हो चुके हैं, लेकिन जब लोग इन सोसायटियों में पहुंचते हैं तो तस्वीर कुछ और ही नजर आती है. कहीं सड़क नहीं है, कहीं पानी और बिजली का इंतजाम अधूरा है तो कहीं वे सुविधाएं ही गायब हैं, जिनके नाम पर लोगों ने अपना घर खरीदा था. शहर की कई हाउसिंग सोसायटियों के निवासियों का कहना है कि उनके प्रोजेक्ट को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) मिल चुका है, यानी आधिकारिक तौर पर वहां रहने की अनुमति है. इसके बावजूद बुनियादी सुविधाओं के लिए उन्हें अब भी इंतजार करना पड़ रहा है.
सेक्टर-108 की ROF Alante सोसायटी इसका एक उदाहरण है. यहां रहने वाले लोगों का दावा है कि सोसायटी तक पहुंचने के लिए उचित सड़क तक उपलब्ध नहीं है. बिजली और पानी के कनेक्शन को लेकर भी उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. यानी जिस जगह को कागजों पर रहने लायक माना गया, वहां पहुंचकर जिंदगी शुरू करना ही चुनौती बन गया. Ambience Mall के पास स्थित Ambience Lagoon के निवासियों ने भी इसी तरह की शिकायतें उठाई हैं. उनका आरोप है कि प्रोजेक्ट में कई वादे किए गए सुविधाएं अब तक पूरी नहीं हुई हैं. कुछ निवासियों ने यह आरोप भी लगाया कि मूल रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट के लिए तय जमीन का इस्तेमाल दूसरी जगह किया गया है.
जब जांच हुई तो खुली OC की पोल
यह समस्या कोई नई शिकायत नहीं है. गुरुग्राम में अप्रैल में मुख्यमंत्री उड़नदस्ता और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग (DTCP) ने संयुक्त रूप से कई रिहायशी प्रोजेक्ट्स का औचक निरीक्षण किया. जांच में ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने Occupancy Certificate जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए. जिन 22 रिहायशी कॉम्प्लेक्स का निरीक्षण किया गया, उनके पास वैध OC मौजूद था. लेकिन इनमें से 14 प्रोजेक्ट्स में निर्माण कार्य अब भी जारी मिला.
निरीक्षकों ने पाया कि कुछ इमारतें महज कंक्रीट के ढांचे जैसी थीं. कई जगह प्लास्टर तक पूरा नहीं हुआ था, फर्श अधूरे थे और किचन-बाथरूम की प्लंबिंग तक चालू स्थिति में नहीं थी. सवाल यही था कि अगर ये प्रोजेक्ट रहने के लिए तैयार नहीं थे, तो इन्हें ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट मिला कैसे?
करीब 1,500 OC पर उठे सवाल
जांच के बाद अधिकारियों ने 1 जुलाई 2025 से 15 मार्च 2026 के बीच जारी किए गए ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट्स की पड़ताल शुरू की. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस जांच में करीब 1,500 OC समय से पहले जारी किए जाने की बात सामने आई. अब सवाल सिर्फ उन घरों का नहीं है, जिनमें लोग सुविधाओं के बिना रह रहे हैं. असली सवाल उस व्यवस्था का है, जिसने अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा मानकर लोगों को वहां रहने की अनुमति दे दी. गुरुग्राम के डिस्ट्रिक्ट टाउन प्लानर (प्लानिंग) प्रवीण चौहान ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया, “हमें ऐसे करीब 1,500 मामले मिले जिनमें बिल्डिंग पूरी न होने के बावजूद OC जारी कर दिए गए थे. हमने संबंधित आर्किटेक्ट्स को ब्लैकलिस्ट कर दिया है.”
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में मौके पर जाकर निरीक्षण करने वाले आर्किटेक्ट्स की भूमिका भी सवालों के घेरे में है. आरोप है कि इन्हीं निरीक्षणों के आधार पर कई प्रोजेक्ट्स को OC देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी. गुरुग्राम जैसे तेजी से बढ़ते शहर में घर सिर्फ चार दीवारों का नाम नहीं है. सड़क, पानी, बिजली और जरूरी सुविधाएं भी उसी घर का हिस्सा हैं. लेकिन अगर OC हाथ में हो और जमीन पर घर अभी भी अधूरा हो, तो यह सिर्फ निर्माण की कमी नहीं, बल्कि उस भरोसे का सवाल है जो घर खरीदने वाला सिस्टम पर करता है.
साल 2022 में हरियाणा विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान, बादशाहपुर के तत्कालीन विधायक राकेश दौलताबाद के एक ‘अनस्टार्ड’ सवाल के जवाब से पता चला कि 1992 से लेकर अब तक गुड़गांव में सिर्फ 93 रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को ही टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट से कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिला है.
बुनियादी सुविधाओं की कमी
ROF Alante में, जिन लोगों ने कई साल पहले 20 लाख रुपये से कुछ ज्यादा कीमत पर घर बुक किए थे, उन्हें 2024 के मध्य के आसपास रहने की मंजूरी (ऑक्यूपेंसी क्लीयरेंस) मिली और उनसे आधुनिक सुविधाओं का वादा किया गया था. द्वारका एक्सप्रेसवे के किनारे प्रॉपर्टी की कीमतें लगभग चार गुना बढ़ने के साथ ही, वहां रहने वालों की संख्या में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई. अब वहां लगभग 450 परिवार रहते हैं, जो पिछले साल की तुलना में लगभग नौ गुना ज्यादा है – और वे इस सोसाइटी की खास लोकेशन से आकर्षित हुए हैं, जो एक्सप्रेसवे से सिर्फ 3 किमी दूर और एयरपोर्ट से आधे घंटे से भी कम दूरी पर है. फिर भी, वहां रहने वालों का कहना है कि जमीनी हकीकत किए गए वादों से बहुत अलग है.

