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किराए के मकान में रहने वाले लोगों और मकान मालिकों के लिए जरूरी खबर है. अचानक किराएदार को घर से निकालना, बिना बताए किराया बढ़ाना, सामान छोड़कर चले जाने और सिक्योरिटी मनी वापस न मिलने जैसे मामलों में क्या हैं कानूनी नियम? एडवोकेट वंदना सिंह ने इसे लेकर सारी जानकारी दी है.
फरीदाबाद: किराए के मकान में रहने वाले लोगों और मकान मालिक के बीच कई बार छोटी-छोटी बातों को लेकर विवाद खड़ा हो जाता है. कभी किराया बढ़ाने को लेकर बात बिगड़ती है, तो कभी मकान खाली कराने और सिक्योरिटी मनी को लेकर विवाद हो जाता है. कई बार किराएदार बिना बताए सामान छोड़कर चला जाता है. ऐसे मामलों में किराएदार और मकान मालिक दोनों के लिए नियमों की जानकारी होना जरूरी है. आखिर मकान मालिक किराएदार को अचानक घर से निकाल सकता है या नहीं, किराया बढ़ाने के क्या नियम हैं, सिक्योरिटी मनी वापस नहीं मिले तो किराएदार क्या कर सकता है. इन सभी सवालों को लेकर एडवोकेट वंदना सिंह ने जरूरी जानकारी दी है.
Local18 से बातचीत में एडवोकेट वंदना सिंह बताती हैं कि फरीदाबाद में बड़ी संख्या में लोग किराए के मकान में रहते हैं. ऐसे में किराएदार और मकान मालिक दोनों को अपने अधिकार और जिम्मेदारियों की जानकारी होनी चाहिए. मकान मालिक किसी किराएदार को अचानक घर से बाहर नहीं निकाल सकता. इसके लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है. पहले लीगल नोटिस देना होता है और इसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जा सकती है. विवाद से बचने के लिए शुरुआत में ही रेंट एग्रीमेंट बनवाना बेहतर रहता है.
एग्रीमेंट में किराए से जुड़ी सभी जरूरी शर्तें
एडवोकेट वंदना सिंह बताती हैं कि रेंट एग्रीमेंट में किराए से जुड़ी सभी जरूरी शर्तें साफ लिखी होनी चाहिए. आमतौर पर 11 महीने का रेंट एग्रीमेंट बनाया जाता है. इसमें मकान का किराया कितना है, किराया कितने समय बाद और कितने प्रतिशत बढ़ाया जाएगा, इसकी जानकारी लिखी होनी चाहिए. इसके साथ ही जरूरी लीगल डॉक्यूमेंट और आईडी प्रूफ भी लिए जाने चाहिए. इससे भविष्य में किसी तरह का विवाद होने पर दोनों पक्षों के पास जरूरी दस्तावेज मौजूद रहते हैं.
एग्रीमेंट के हिसाब बढ़ेगा रेंट
एडवोकेट वंदना सिंह बताती हैं कि बिना बताए अचानक किराया बढ़ाना सही नहीं है. रेंट एग्रीमेंट एक कानूनी दस्तावेज होता है और उसमें लिखी शर्तों का पालन करना जरूरी होता है. अगर एग्रीमेंट में किराया बढ़ाने का प्रतिशत पहले से तय है, तो उसी के हिसाब से किराया बढ़ाया जा सकता है. लेकिन बिना किसी तय शर्त के अचानक किराया बढ़ाने से विवाद की स्थिति बन सकती है. इसलिए किराया बढ़ाने से पहले एग्रीमेंट की शर्तों को देखना जरूरी है.
एडवोकेट वंदना सिंह बताती हैं कि अगर किराएदार अपना सामान मकान में छोड़कर चला जाता है और लंबे समय तक संपर्क नहीं करता है, तो मकान मालिक को सीधे सामान हटाने के बजाय पहले नोटिस देना चाहिए. नोटिस के बाद भी किराएदार की तरफ से कोई जवाब नहीं आता है, तो मकान मालिक कोर्ट का रास्ता अपना सकता है. ऐसे मामले में सिविल कोर्ट में कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा सकती है. बिना कानूनी प्रक्रिया के किराएदार का सामान हटाना आगे चलकर विवाद की वजह बन सकता है.
सिक्योरिटी मनी को लेकर क्या है नियम?
एडवोकेट वंदना सिंह बताती हैं कि सिक्योरिटी मनी वापस नहीं मिलने की स्थिति में किराएदार कानूनी रास्ता अपना सकता है. इसके लिए सिविल कोर्ट में रिकवरी का केस किया जा सकता है. कोर्ट की तरफ से संबंधित पक्ष को नोटिस भेजा जाएगा और मामले की सुनवाई कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होगी. इसलिए सिक्योरिटी मनी से जुड़े विवाद में दस्तावेज और रेंट एग्रीमेंट संभालकर रखना जरूरी है.
बिना पुलिस वेरिफिकेशन के किराएदार रखना जोखिम
एडवोकेट वंदना सिंह बताती हैं कि बिना पुलिस वेरिफिकेशन के किराएदार रखना मकान मालिक के लिए जोखिम भरा हो सकता है. फरीदाबाद में अलग-अलग राज्यों से लोग काम और पढ़ाई के लिए आकर किराए पर रहते हैं. ऐसे में मकान मालिक को किराएदार की पहचान और जरूरी दस्तावेजों की जांच के साथ पुलिस वेरिफिकेशन भी करवाना चाहिए. अलफलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े मामले का जिक्र करते हुए पुलिस वेरिफिकेशन की जरूरत पर जोर दिया. मकान मालिक अगर शुरुआत से ही दस्तावेज और पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी रखता है, तो आगे होने वाली परेशानी से काफी हद तक बचा जा सकता है.
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आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली से साल 2024 में…
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