Oil price surged : ईरान में अमेरिकी हमला तेज होने और हुती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में तेल लदे टैंकरों को निशाना बनाने की वजह से तेल की कीमतों में आग लग गई है। शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमत मई महीने के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल पार कर गई। तेल की कीमतों के आसमान में पहुंचने से भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है।
लगातार बढ़ रही थीं कीमतें
तेल की कीमतों के लिए ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड में गुरुवार को 6% से ज्यादा का उछाल देखा गया। अमेरिका द्वारा ईरान पर हमला तेज करने के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमतें पिछले कई दिनों से लगातार बढ़ रही थीं।
लाल सागर में हुतियों का अटैक
वहीं, यमन में ईरान समर्थित हुती विद्रोही लाल सागर में लगातार तेल लदे जहाजों पर हमले कर रहे हैं, इसकी वजह से भी तेल की कीमतें बढ़ी हैं। दरअसल, सऊदी अरब अपने तेल का निर्यात होर्मुज स्ट्रेट के बजाय लाल सागर के रास्ते कर रहा है।
‘ईरान समझौते के लिए तैयार नहीं’
पिछले महीने गैस की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच कुछ समय के लिए हुई युद्ध-विराम संधि के बाद तेल की कीमतें गिर रही थीं। कीमतें गिरकर उस स्तर पर आ गई थीं, जो 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू करने से पहले देखी गई थीं। हालांकि, युद्ध-विराम संधि नाकाम हो गई और इस हफ्ते अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ईरान के जिम्मेदार लोग “समझौता करने को तैयार नहीं” हैं।
महंगा हो सकता है तेल
मौजूदा संघर्ष से भारत, ब्रिटेन और अमेरिका समेत कई देशों में महंगाई बढ़ने का खतरा है, जिससे उपभोक्ताओं को अधिक दाम चुकाने पड़ेंगे। भारत अपनी कुल तेल जरूरत का 85% आयात करता है। तेल की ऊंची कीमतों के कारण आमतौर पर पेट्रोल और डीजल महंगे हो जाते हैं। वाहनों पर सीधा असर तो पड़ेगा ही, साथ ही व्यवसायों द्वारा परिवहन लागत में वृद्धि का बोझ ग्राहकों पर डालने के कारण परिवारों को खाद्य पदार्थों जैसी अन्य वस्तुओं की कीमतों में भी वृद्धि देखने को मिल सकती है।

