Punjab News: CBI ने पंजाब के मुख्यमंत्री के ऑफिस से जुड़े कथित ‘ट्रांसफर-पोस्टिंग के बदले पैसे’ (कैश-फॉर-ट्रांसफर-पोस्टिंग) के भ्रष्टाचार मामले में अपनी जांच तेज़ कर दी है। एजेंसी की टीमों ने चंडीगढ़ और पंजाब में कई जगहों पर छापेमारी की है। मोहाली, संगरूर और चंडीगढ़ के सेक्टर-2 समेत कई जगहों पर जांच चल रही है।
CBI की एक टीम चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री के कैंप ऑफिस पहुंची है, जहां अभी जांच चल रही है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री के OSD के भाई के मोहाली के फेज-11 स्थित घर पर भी तलाशी ली जा रही है। CBI की कार्रवाई चंडीगढ़ के सेक्टर-50 और संगरूर के घराचोन गांव में भी चल रही है।
यह कार्रवाई पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के 5 अक्टूबर को दिए गए आदेश के बाद की गई है। मामले की CBI जांच का आदेश देते हुए, कोर्ट ने निर्देश दिया था कि मुख्यमंत्री के OSD, राजबीर सिंह घुमन के खिलाफ दर्ज FIR के आधार पर दो महीने के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपी जाए।
इससे पहले, पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने CBI जांच के हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। पंजाब सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे सीनियर वकील विकास सिंह ने मामले पर तत्काल सुनवाई की मांग की थी। हालांकि, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने तत्काल सुनवाई की मांग को ठुकरा दिया और कहा कि मामले पर अगले दिन या उसके बाद सुनवाई हो सकती है।
इस बीच, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब के DGP गौरव यादव को पत्र लिखकर भ्रष्टाचार और आधिकारिक कामकाज में दखलंदाजी के आरोपों पर FIR दर्ज करने को कहा है। ED की जांच में ट्रांसफर और पोस्टिंग से जुड़े मुद्दों के अलावा सरकारी टेंडर, नीतिगत फैसलों, ज़मीन के इस्तेमाल में बदलाव और अन्य प्रशासनिक मामलों को प्रभावित करने के आरोप सामने आए हैं।
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ED की कार्रवाई के दौरान कई लोगों के नाम सामने आए हैं – जिनमें नितिन गोहल, रियल एस्टेट व्यवसायी अजय सहगल और सुरेश कुमार बजाज शामिल हैं। जांच में मुख्यमंत्री के OSD, राजबीर सिंह घुमन से कथित संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है।
ED का आरोप है कि कुछ लोग सरकारी अधिकारियों की पोस्टिंग और ट्रांसफर समेत प्रशासनिक फैसलों को प्रभावित करने के लिए बिचौलिये का काम कर रहे थे। जांच के दौरान मिली कथित बातचीत और अन्य दस्तावेजों में सरकारी पदों पर नियुक्ति, ट्रांसफर और पोस्टिंग के बारे में चर्चा होने की बात सामने आई है।
इसके अलावा, मार्कफेड टेंडर, अधिकारियों की तैनाती, लाइसेंस जारी करने और अन्य सरकारी मंजूरियों को प्रभावित करने की कोशिशों के आरोप भी लगे हैं। ED के मुताबिक, इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के साथ-साथ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
