Monetary policy review July (द भारत ख़बर), मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक सोमवार को शुरू हो गई। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मौद्रिक नीति समिति बैठक के बाद 5 अगस्त को बेंचमार्क रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रख सकती है। आरबीआई ने पश्चिम एशिया में भूराजनैतिक तनाव और महंगाई, कच्चे तेल एवं वित्तीय बाजारों पर इसके संभावित असर को देखते हुए जून में हुई नीति समीक्षा में रेपो रेट में कोई बदलाव न करते हुए इसे 5.25% पर बरकरार रखा था।
RBI का मध्यम अवधि का लक्ष्य पार
जुलाई महीने में महंगाई में बढ़ोतरी का सिलसिला बरकरार है। जून में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.38% पर पहुंच गई, जो बीते 17 महीनों में पहली बार आरबीआई की मध्यम-अवधि के 4% के लक्ष्य को पार कर गई। हालांकि, यह 2-6% की सीमा के अंदर बनी हुई है। खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव को दर्शाने वाला कोर इन्फ्लेशन 4% पर है।
महंगाई का अनुमान बढ़ाया
आरबीआई ने वैश्विक स्तर पर महंगे होते तेल की वजह से घरेलू तेल की कीमतें बढ़ने से लागत बढ़ने का हवाला देते हुए महंगाई के अनुमान को 4.6% से बढ़ाकर 5.1% कर दिया था। साथ ही, उसने वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी विकास दर अनुमान को अप्रैल के 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया था।
‘दरों में बढ़ोतरी की संभावना कम’
सिटी के मुख्य भारत अर्थशास्त्री समीरन चक्रवर्ती ने कहा, “हालांकि कोर और अंडरलाइंग महंगाई में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन वे RBI के दायरे में ही हैं। इसलिए, 2026 में दरों में बढ़ोतरी की संभावना कम है, जब तक कि कोर महंगाई 4.5% से ऊपर बनी न रहे। SBI ग्रुप के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष ने कहा कि मौजूदा मैक्रो-इकोनॉमिक हालात को देखते हुए RBI के लिए दरों में ढील देने का संकेत देने की गुंजाइश बहुत कम है।

