अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बाद भारत ने फिर से रूसी तेल का रिकॉर्ड आयात किया
Crude Oil (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के बाद पिछले दो माह में रूस एक बार फिर से भारत की तेल जरूरतों को पूरा करने में प्रमुख भागीदार के रूप में उभरा है।
ज्ञात रहे की ईरान के साथ जारी तनाव के बाद अमेरिका ने भारत सहित विश्व के कई देशों को रूस से कच्चा तेल खरीदने की अनुमति दे दी थी। जिसके बाद भारत ने भारी मात्रा में रूस से कच्चा तेल आयात किया। जिसका असर यह हुआ की भारत में न केवल पेट्रोल और डीजल की कीमत कंट्रोल में रही बल्कि इसकी सप्लाई पर भी कोई ज्यादा असर नहीं हुआ।
ब्रिक्स सम्मेलन में यह बोले रूसी विदेश मंत्री
वैश्विक दबाव और पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों के बावजूद भारत और रूस के बीच ऊर्जा संबंध लगातार मजबूत बने हुए हैं। नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने साफ किया है कि भारत को रूसी कच्चे तेल के निर्यात में भारी इजाफा हुआ है।
दोनों देशों के बीच जारी ऊर्जा संबंध भारत की उस स्पष्ट कूटनीति को दर्शाता है, जिसके तहत वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय हितों को सबसे ऊपर रखता है। रूस अब भारत के लिए कच्चे तेल का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। वैश्विक प्रतिबंधों के बावजूद भारत रियायती दरों पर रूसी तेल खरीद रहा है, जो इसकी कॉस्ट-इफेक्टिव (किफायती) ईंधन हासिल करने की नीति का हिस्सा है।
लावरोव ने अमेरिका पर लगाए आरोप
ब्रिक्स सम्मेलन से इतर लावरोव ने अमेरिकी रणनीतियों की तीखी आलोचना की। उन्होंने अमेरिका पर दुनिया के ऊर्जा संसाधनों पर एकाधिकार जमाने की कोशिश करने का गंभीर आरोप लगाया। लावरोव के अनुसार, अमेरिका सुनियोजित तरीके से लुकआॅयल और रोसनेफ्ट जैसी दिग्गज रूसी ऊर्जा कंपनियों को वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं से बाहर धकेलने का प्रयास कर रहा है। उनका यह भी दावा है कि अमेरिकी नेतृत्व हर महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति मार्ग को अपने नियंत्रण में लेना चाहता है, जो कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर हावी होने की उसकी व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
ये भी पढ़ें : Business News Update : उच्चतम स्तर पर पहुंचा देश का व्यापार घाटा

