Sensex Nifty Today News: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। कारोबारी सप्ताह के चौथे दिन बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी दोनों मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 1300 अंकों से अधिक उछल गया, जबकि निफ्टी ने 24300 का अहम स्तर पार कर लिया। बाजार में चौतरफा खरीदारी से निवेशकों का उत्साह बढ़ा और बैंकिंग, ऑटो तथा वित्तीय क्षेत्र के शेयरों में अच्छी तेजी देखने को मिली।
शुरुआती बाजार आंकड़ों के मुताबिक सेंसेक्स 1,364 अंक यानी 1.77 फीसदी की बढ़त के साथ 78,666 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी 50 में 374.40 अंकों यानी 1.56 फीसदी की तेजी आई और यह 24,335 के स्तर पर कारोबार करने लगा। सुबह 9:18 बजे की रिपोर्ट में सेंसेक्स 78,719 और निफ्टी 24,357 के स्तर पर दर्ज किए गए थे। इससे बाजार में तेजी की पुष्टि होती है।
सेंसेक्स 1300 अंक उछला
गुरुवार को बाजार खुलते ही सेंसेक्स में जोरदार खरीदारी देखने को मिली। निवेशकों की मजबूत लिवाली के चलते प्रमुख इंडेक्स तेजी से ऊपर चढ़ा। सेंसेक्स में 1,364 अंकों से अधिक की बढ़त ने बाजार की सकारात्मक धारणा को दर्शाया। बाजार में तेजी का असर बड़ी कंपनियों के शेयरों पर भी दिखाई दिया। बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, फाइनेंस और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में खरीदारी का माहौल रहा। विदेशी निवेशकों की वापसी ने भी घरेलू शेयर बाजार को मजबूती दी।
24,300 के पार पहुंचा निफ्टी
निफ्टी ने भी गुरुवार को शानदार प्रदर्शन किया। शुरुआती कारोबार में इंडेक्स 24,300 के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर गया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार निफ्टी 374 अंक चढ़कर 24,335 पर पहुंच गया। निफ्टी में तेजी से बाजार के व्यापक रुझान को लेकर निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ। खासतौर पर बड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी ने इंडेक्स को ऊपर ले जाने में अहम भूमिका निभाई।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
भारतीय शेयर बाजार में तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत भी अहम रहे। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में गिरावट ने भारतीय बाजार की धारणा को मजबूत किया। 5 नवंबर की सुबह ब्रेंट क्रूड करीब 93.50 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में इसमें लगभग 8.7 फीसदी की बड़ी गिरावट आई थी। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।

