सोनीपत. हरियाणा की महिला पहलवान विनेश फोगाट (Vinesh Phogat) ने यौन शोषण मामले में बृजभूषण शरण सिंह के बरी होने पर पहली प्रतिक्रिया दी है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर अदालत के फैसले पर विनेश फोगाट ने दुख जताया है. जहां वे इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में जाने की बात कह चुके हैं, वहीं उन्होंने सीधे सरकार पर भी आरोप लगाए हैं. विनेश का कहना है कि ‘शुरू दिन से ही सारा तंत्र, सरकार और ये सिस्टम बृजभूषण को बचाने के लिए लगा हुआ है.’
क्या बोलीं विनेश फोगाट
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए विनेश ने लिखा कि ‘हमें सड़क पर उतरने और सत्ताधारी पार्टी के एक बाहुबली नेता के खिलाफ FIR दर्ज करवाने के लिए बहुत हिम्मत जुटानी पड़ी थी. सत्ता और अपने बाहुबल के दम पर बृजभूषण ने कई लड़कियों को डराकर उनके नाम वापस करवाए हैं, लेकिन कई महिला पहलवान खड़ी रहीं और कोर्ट में बृजभूषण के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ती रहीं. हमें इस बात का बहुत दुख है कि अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन हिंसा के आरोपों में दोषी नहीं माना.’
विनेश ने लिखा कि ‘शुरू दिन से ही सारा तंत्र, सरकार और ये सिस्टम बृजभूषण को बचाने के लिए लगा हुआ है. महिला पहलवानों ने अपने वकीलों को इस फैसले के खिलाफ अपील करने का निर्देश दे दिया है और यह जल्द से जल्द की जाएगी. हमने उम्मीद नहीं छोड़ी है और पहलवान अपनी लड़ाई जारी रखेंगे.’ गौरतलब है कि मौजूदा समय में विनेश विदेश दौरे पर हैं. इससे पहले, बजरंग पुनिया ने कहा था कि वह मामले में अब हाईकोर्ट में अपील करेंगे. फिलहाल, वह दिल्ली में हैं.
बृजभूषण कर दिए गए हैं बरी
दरअसल, सोमवार को महिला पहलवानों द्वारा दायर यौन उत्पीड़न के मामले में भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह और सह-आरोपी विनोद तोमर को बरी कर दिया. अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) अश्विनी पंवार ने इस मामले में भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह और डब्ल्यूएफआई के पूर्व सहायक सचिव तोमर को बरी कर दिया. छह महिला पहलवानों द्वारा दर्ज कराए गए मामले में अंतिम बहस पूरी होने के बाद दो जुलाई को अदालत ने आदेश तीन अगस्त के लिए सुरक्षित रख लिया था.
मई 2024 में, एक अदालत ने सिंह के खिलाफ आपराधिक धमकी देने का आरोप तय करने का आदेश दिया था. हालांकि, छह महिला पहलवानों में से एक की शिकायत के मामले में उन्हें बरी कर दिया गया था. दिल्ली पुलिस ने छह बार सांसद रहे सिंह के खिलाफ 15 जून को भारतीय दंड संहिता की धाराओं 354 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग), 354ए (यौन उत्पीड़न), 354डी (पीछा करना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत आरोपपत्र दाखिल किया था.
