फरीदाबाद. हरियाणा के फरीदाबाद में सरकार ने ग्रामीण इलाकों के बच्चों को बेहतर और सस्ती नर्सिंग शिक्षा देने के लिए दो बड़े नर्सिंग कॉलेज तैयार किए, लेकिन इन कॉलेजों की इमारतें बनने और उद्घाटन होने के बाद भी यहां आज तक पढ़ाई शुरू नहीं हो पाई है. दयालपुर और अरुआ गांव में करीब 93 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इन दोनों सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में अभी तक बच्चों की कक्षाएं नहीं लगी हैं. एक तरफ करोड़ों रुपये की लागत से तैयार भवन खड़े हैं, दूसरी तरफ गांवों के बच्चे नर्सिंग की पढ़ाई के लिए आज भी दूर के कॉलेजों का रुख करने को मजबूर हैं. लोकल 18 से दयालपुर गांव के ग्रामीण पदम सिंह बताते हैं कि सरकार की नीति और नियत अच्छी है. इसी वजह से मेरे गांव को इतना अच्छा नर्सिंग कॉलेज मिला है, जिससे आसपास के करीब 25 गांवों के बच्चों को फायदा मिल सकता है. कॉलेज बने और उसका उद्घाटन हुए करीब एक साल हो चुका है, लेकिन आज तक यहां क्लास शुरू नहीं हुई है. यह अधिकारियों की फेलियर है, क्योंकि जब भवन बनकर तैयार है और उद्घाटन भी हो चुका है तो फिर पढ़ाई शुरू करने में इतनी देरी क्यों हो रही है.
मुख्यमंत्री से अपील
पदम सिंह बताते हैं कि यह मामला सिर्फ एक कॉलेज का नहीं है, बल्कि गांव के बच्चों के भविष्य से जुड़ा हुआ है. अगर सरकारी स्तर पर अधिकारी काम नहीं कर पा रहे हैं तो यह सरकार के लिए भी चिंता की बात है. मेरी मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से अपील की कि दयालपुर नर्सिंग कॉलेज को जल्द से जल्द शुरू कराया जाए, ताकि आसपास के गांवों के बच्चों को इसका फायदा मिल सके. बच्चों का समय निकलता जा रहा है और अगर कॉलेज इसी तरह बंद रहा तो इसका सीधा नुकसान विद्यार्थियों को होगा. राज्य मंत्री राजेश नागर का कहना है कि कॉलेज किस स्तर पर लंबित हैं, इसकी जानकारी ली जाएगी. मुख्यमंत्री से बातचीत कर दोनों संस्थानों में जल्द कक्षाएं शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा.
प्राथमिकता मिलनी चाहिए
दयालपुर गांव के मनोज कुमार ने भी कॉलेज बंद रहने पर नाराजगी जताई. मनोज कुमार बताते हैं कि नर्सिंग कॉलेज को अब किसी भी हालत में चालू किया जाना चाहिए. इसे अधिकारियों की नाकामी ही कहा जाएगा, क्योंकि इतना बड़ा भवन तैयार होने के बावजूद यहां पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी है. अगर अधिकारी थोड़ा ध्यान दें और जरूरी प्रक्रिया पूरी करें तो कॉलेज में पढ़ाई शुरू हो सकती है और बड़ी संख्या में गांव के बच्चों को इसका फायदा मिलेगा. गांव के लोगों की एक और मांग है कि जब यह कॉलेज शुरू हो तो दयालपुर गांव के बच्चों के लिए भी कोई व्यवस्था होनी चाहिए. गांव की बच्चियां अभी दूर-दराज के कॉलेजों में पढ़ने के लिए जाने को मजबूर हैं. ऐसे में अगर गांव में ही सरकारी नर्सिंग कॉलेज बना है तो स्थानीय बच्चों को इसका लाभ मिलना चाहिए. जिस कॉलेज के लिए गांव की जमीन गई है, वहां गांव के लोगों को रोजगार और बच्चों को पढ़ाई में भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए.
93 करोड़ की आई लागत
मनोज कुमार बताते हैं कि यह जमीन ग्राम पंचायत और गांव के लोगों की थी, इसलिए गांव के लोगों को उम्मीद है कि कॉलेज शुरू होने के बाद उन्हें इसका फायदा मिलेगा. सरकार से मांग की कि स्थानीय बच्चों के लिए गांव का कोटा या आरक्षण जैसी कोई व्यवस्था की जाए, ताकि जिस गांव की जमीन पर कॉलेज बना है, वहां के बच्चों को भी इसका सीधा लाभ मिल सके. दयालपुर गांव के पवन ने कॉलेज के निर्माण से लेकर अब तक की पूरी कहानी बताते हुए कहा कि हरियाणा सरकार ने साल 2018 में इस नर्सिंग कॉलेज को मंजूरी दी थी. पवन बताते हैं कि साल 2019 में इसकी नींव रखी गई और साल 2025 में कॉलेज की इमारत पूरी तरह तैयार हो गई. दयालपुर और अरुआ दोनों जगह नर्सिंग कॉलेज करीब 93 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए हैं. जब सरकार ने इतना पैसा खर्च किया और गांव की जमीन भी ली गई तो फिर कॉलेज को चालू क्यों नहीं किया जा रहा है. बच्चों के एडमिशन नहीं हो पा रहे हैं और जिन विद्यार्थियों को दो साल पहले पढ़ाई शुरू कर देनी चाहिए थी, उनका समय भी निकल रहा है. अगर कॉलेज को शुरू होने में अभी और दो चार साल लग गए तो उन बच्चों का क्या होगा, जो नर्सिंग की पढ़ाई करना चाहते हैं और सरकारी कॉलेज का इंतजार कर रहे हैं.
हॉस्टल की सुविधा भी तैयार
पवन बताते हैं कि इस मामले पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए और एडमिशन की प्रक्रिया जल्द शुरू करनी चाहिए. दयालपुर और अरुआ के आसपास रहने वाले बच्चों को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा. मेरी सरकार से यह भी मांग की कि स्थानीय गांवों के बच्चों के लिए कोई वेलफेयर या कोटा तय किया जाए, ताकि गांव की जमीन पर बने कॉलेज का लाभ गांव के बच्चों को भी मिल सके. दयालपुर में तैयार नर्सिंग कॉलेज के भवन पर करीब 45 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. यहां करीब 48 कमरे और छह भवन बनाए गए हैं. कॉलेज में करीब 208 विद्यार्थियों के रहने के लिए हॉस्टल की सुविधा भी तैयार की गई है. अरुआ गांव में बने नर्सिंग कॉलेज पर करीब 47.44 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. दोनों भवन तैयार होने के बावजूद विभागीय टेकओवर की प्रक्रिया पूरी नहीं होने की वजह से यहां शैक्षणिक गतिविधियां शुरू नहीं हो सकी हैं.
इन गांवों को फायदा
पदम सिंह का कहना है कि अगर सरकार और अधिकारी समय रहते प्रक्रिया पूरी कर दें तो इन भवनों का इस्तेमाल शुरू हो सकता है. मनोज कुमार का कहना है कि ग्रामीण बच्चों के लिए यह कॉलेज किसी बड़ी सुविधा से कम नहीं है. पवन का कहना है कि सरकार को करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद अब कॉलेज शुरू करने में और देरी नहीं करनी चाहिए. दयालपुर और अरुआ के नर्सिंग कॉलेज शुरू होने से आसपास के दर्जनों गांवों के विद्यार्थियों को फायदा मिलने की उम्मीद है. अरुआ कॉलेज से साहूपुरा, फैजपुर खादर, शाहजहांपुर, चांदपुर, इमामुद्दीनपुर, मोठूका, कोराली और छायंसा जैसे गांवों के बच्चों को फायदा मिल सकता है. वहीं दयालपुर कॉलेज से खुंद जेहेड़ा, अटाली, पन्हेड़ा, गढ़खेड़ा, हीरापुर, नरियाला, बढ़क, फतेहपुर बिल्लौच, सोतई, चंदावली और मच्छगर सहित आसपास के कई गांवों के विद्यार्थियों को नजदीक सरकारी नर्सिंग शिक्षा मिल सकती है.

