Crude oil prices fell: अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा ईरान में नए हमले रोकने की घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमत में जबरदस्त गिरावट आई है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत में प्रति बैरल 4 डॉलर की कमी देखी गई। ट्रंप ने ईरान पर नए हमले रोकने के साथ तेहरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं और होर्मुज स्ट्रेट को खोलने को लेकर एक तत्काल समझौता करने की इच्छा जताई है।
3 अगस्त को कच्चे तेल की कीमत
ब्रेंट क्रूड फ्यूचर की कीमत प्रति बैरल 4.37 डॉलर या 5% लुढ़ककर 83.56 डॉलर पर आ गई। वहीं, वेस्ट टेक्सा इंटरमीडियट क्रूड की कीमत प्रति बैरल 4.63 डॉलर या 5.5% घटकर 80 डॉलर पर आ गई।
भारत पर क्या पड़ सकता है असर?
भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा क्रूड ऑयल विदेशों से खरीदता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव सीधे देश के आयात बिल पर असर डालता है। अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक निचले स्तर पर बनी रहती हैं, तो इससे आयात खर्च घट सकता है और महंगाई बढ़ने की आशंका टल सकती है। इसके अलावा, पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ने की आशंका भी नहीं रहेगी। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की हर हलचल पर भारत की नजर बनी रहती है।
जुलाई में 23% महंगा हुआ था क्रूड
जुलाई में लगभग 23% की तेज बढ़त के बाद सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 5% से ज्यादा गिरकर 80 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया। इस पूरे घटनाक्रम के बीच OPEC+ के प्रमुख उत्पादकों ने प्रोडक्शन कोटा में एक और मामूली बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। इससे 2023 में की गई प्रोडक्शन कटौती को वापस लेने की योजना पूरी हो गई है और क्षेत्रीय तनाव कम होने पर सप्लाई और बढ़ाने की गुंजाइश भी बन गई है।
ट्रंप से की समाधान की अपील
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि सऊदी अरब और मध्य पूर्व के दूसरे अहम सहयोगियों ने अमेरिका से कूटनीतिक समाधान की अपील की है और होर्मुज स्ट्रेट को जल्द से जल्द दोबारा खोलने का समर्थन किया। पिछले महीने अमेरिका और ईरान के बीच फिर से तनाव बढ़ने से अंतरिम शांति समझौता बाधित हुआ और होर्मुज स्ट्रेट एवं लाल सागर में सप्लाई का जोखिम बढ़ गया, जिससे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई थीं।

