भारत में भी मानसून पर बुरे प्रभाव के संकेत
El Nino, (द भारत ख़बर), नई दिल्ली: विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने शुक्रवार को चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थितियां आने वाले महीनों में तेजी से मजबूत हो सकती हैं। इसके कारण दुनिया के कई हिस्सों में भीषण लू, सूखा, मूसलाधार बारिश और अन्य चरम मौसमी घटनाओं का खतरा काफी बढ़ गया है।
डब्ल्यूएमओ की ग्लोबल सीजनल क्लाइमेट अपडेट रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई से सितंबर के दौरान अल-नीनो के मजबूत होने की संभावना है। संगठन का कहना है कि इसका असर वैश्विक मौसम पर व्यापक रूप से देखने को मिलेगा।
जमीन और समुद्र पर हीटवेव की तीव्रता बढ़ सकती
डब्ल्यूएमओ की महासचिव सेलेस्टे साउलो ने कहा कि अल-नीनो की परिस्थितियां पहले ही बन चुकी हैं और इनके तेजी से मजबूत होने के संकेत मिल रहे हैं। इससे कई देशों में सूखे और भारी बारिश जैसी चरम मौसमी घटनाओं के साथ-साथ जमीन और समुद्र दोनों पर हीटवेव की तीव्रता बढ़ सकती है।
भारत में जुलाई में भी औसत से कम बारिश होने की आशंका
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 12 जून को ही देश में अल नीनो की दस्तक की घोषणा कर कहा था कि दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान यह और मजबूत होगा। इसका असर जून में दिखा था, जब बारिश देश में 40% बारिश कम हुई थी। मध्य भारत सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां 50.4% कम वर्षा दर्ज की गई थी। आईएमडी ने जुलाई में भी औसत से कम बारिश होने की आशंका जताई है।

