डब्ल्यूटीओ की 14वीं मंत्री स्तरीय कांफ्रेंस को भारत के उद्योग मंत्री ने किया संबोधित
WTO Conference (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : कैमरून की राजधानी याउंडे में डब्ल्यूटीओ की 14वीं मंत्री स्तरीय कांफ्रेंस के पहले दिन वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, ई-कॉमर्स व्यापार पर सीमा शुल्क पर रोक की अवधि को और बढ़ाने के संबंध में सावधानीपूर्व पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, एक दोषपूर्ण विवाद समाधान प्रणाली ने सदस्यों को प्रभावी निवारण से वंचित कर दिया है।
हमें स्वचालित और बाध्यकारी विवाद समाधान प्रणाली को बहाल करना होगा। भारत ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के सदस्यों से आह्वान किया कि वे संगठन की विवाद समाधान प्रणाली को पूरी तरह कार्यशील बनाने की दिशा में काम करें, क्योंकि वर्तमान में यह प्रणाली निष्क्रिय होने के कारण देशों को प्रभावी राहत नहीं मिल पा रही है।
2009 से ठीक से काम नहीं हो रहा
ब्ल्यूटीओ की विवाद निपटान व्यवस्था 2009 से ठीक से काम नहीं कर रही है क्योंकि अमेरिका ने अपीलीय निकाय में सदस्य देशों की नियुक्तियों में बाधा डाली है। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के सदस्य देशों ने 1998 से इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन पर सीमा शुल्क नहीं लगाने पर सहमति व्यक्त की है। इस रोक को समय-समय पर मंत्रिस्तरीय सम्मेलनों (एमसी) में बढ़ाया गया है।
डब्ल्यूटीओ का मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 166 सदस्यों का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय है। भारत ने सीमा शुल्क स्थगन के दायरे पर चर्चा करने की आवश्यकता पर बार-बार बल दिया है, क्योंकि इससे राजस्व पर प्रभाव पड़ता है। चार दिवसीय मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 29 मार्च को समाप्त होगा।
सावधानीपूर्वक पुनर्विचार की जरूरत
उन्होंने कहा, इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन को लेकर सीमा शुल्क पर स्थगन के दायरे के मामले में सदस्यों के बीच आम सहमति के अभाव में और इसके संभावित महत्वपूर्ण प्रभावों को देखते हुए, इस स्थगन के निरंतर विस्तार पर सावधानीपूर्वक पुनर्विचार की आवश्यकता है। डब्ल्यूटीओ सुधारों पर मंत्री ने कहा कि आवश्यक सुधार एक पारदर्शी, समावेशी और सदस्य-संचालित प्रक्रिया के माध्यम से किए जाने चाहिए। इसमें विकास को केंद्र में रखा जाए और गैर-भेदभाव, आम सहमति आधारित निर्णय लेने और समानता जैसे मूलभूत सिद्धांतों को बनाए रखा जाए।

