केंद्र सरकार का दावा विकसित भारत की तरफ उसका पहला कदम है इस बार का बजट
Budget 2026 (द भारत ख़बर), नई दिल्ली : आज जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश के सामने वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश कर रहीं होंगी तो न केवल देश बल्कि विदेशों में भी अनगिनत लोगों की नजर उनपर होगी। भारत जैसे तेजी से उभरते और विशाल देश के लिए इस बार का बजट कई बातों में बहुत खास है।
केंद्र सरकार जहां इस बजट को विकसित भारत 2047 के सपने को हकीकत में बदलने की दिशा में पहला कदम बता रही है तो वहीं देखना यह होगा की इस बार वित्त मंत्री बजट से कैसे देश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ आम आदमी से लेकर उद्योगपति को कैसे संतुष्ट करती हैं। वो कैसे सिद्ध करती हैं कि यह केवल आंकड़ों का लेखा-जोखा नहीं होगा। यह वैश्विक आर्थिक युद्ध के बीच भारत की ‘रणनीतिक ढाल’ होगी।
इसलिए चुनौती पूर्ण होगा यह बजट
एक तरफ अमेरिका में ‘ट्रंप 2.0’ के साथ संरक्षणवादी टैरिफ की सुनामी उठ रही है। दूसरी तरफ भारत के पास खुद को एक अभेद्य आर्थिक किले में तब्दील करने की चुनौती है। इस बार का ‘सरप्राइज’ मध्य वर्ग की राहतों से आगे निकलकर व्यापार को ‘अपराधमुक्त’ करने और ‘आपूर्ति पक्ष’ को दुनिया का सबसे शक्तिशाली इंजन बनाने वाला हो सकता है। पिछले बजटों का पूरा जोर बाजार में ‘मांग’ पैदा करने पर था। लेकिन आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के पन्ने गवाही दे रहे हैं कि अब बाजी पलट चुकी है। अब सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि वह मांग भारतीय कारखानों से पूरी हो, न कि आयातित माल से।
बजट में 100 से अधिक कानूनों में संशोधन संभव
इस बजट का सबसे क्रांतिकारी पहलू उद्योगों को नियम-कायदों के बोझिल जाल से मुक्त करना है। सरकार का मानना है कि मामूली तकनीकी चूकों पर जेल का प्रावधान निवेश के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा है। बजट में ‘जन विश्वास अधिनियम 2.0’ के जरिये 100 से अधिक कानूनों में संशोधन संभव है। अब छोटी गलतियों को ‘अपराध’ की श्रेणी से बाहर कर दिया जाएगा। इसमें जेल के बजाय केवल आर्थिक जुमार्ने का प्रावधान होगा।
पीएम मोदी ने भी हाल ही में कहा था कि हमें धन सृजन करने वालों पर भरोसा करना होगा। यह बजट उसी दिशा में ‘इंस्पेक्शन राज’ को खत्म कर ‘स्व-प्रमाणन’ की नई संस्कृति शुरू कर सकता है। भारतीय जीडीपी में विनिर्माण का हिस्सा फिलहाल लगभग 17.3 प्रतिशत है। सरकार इसे बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने के लिए आर-पार की लड़ाई के मूड में है। चालू वित्त वर्ष में इस क्षेत्र में 7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो एक शुभ संकेत है। भारतीय स्टील और टेक्सटाइल पर संभावित ट्रंप टैरिफ का मुकाबला करने के लिए भारत अब अपनी आंतरिक क्रय शक्ति को ही आधार बना रहा है।
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