अमेरिकी सुप्रीमकोर्ट द्वारा टैरिफ को अवैध घोषित करने के बाद चीन की तरफ से तीखी प्रक्रिया आई सामने
Business News (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : गत शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दुनिया भर के देशों पर लगाए गए टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया गया। इस फैसले के बाद भारत सहित सभी देशों की तरफ से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। ऐसी ही एक प्रतिक्रिया चीन की तरफ से सामने आई है। चीन ने अमेरिका से सभी एकतरफा टैरिफ वापस लेने की मांग की है। इस बीच, ट्रंप प्रशासन ने कानूनी रूप से मान्य नए 15 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है, जिससे दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक तनाव फिर से गहराने की आशंका है।
चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने यह कहा
इस फैसले के बाद चीन के वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने सोमवार को कहा कि चीन हमेशा से किसी भी रूप में एकतरफा टैरिफ बढ़ोतरी का विरोध करता रहा है। प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका द्वारा उठाए गए एकतरफा कदम- जिसमें पारस्परिक और फेनटैनिल से जुड़े टैरिफ शामिल हैं- न केवल अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों का उल्लंघन करते हैं, बल्कि अमेरिकी घरेलू कानून के भी खिलाफ हैं और इससे किसी भी पक्ष का हित नहीं होता। प्रवक्ता ने आगाह किया कि अमेरिका अपने व्यापारिक भागीदारों पर टैरिफ बनाए रखने के लिए ‘व्यापार जांच’ जैसे वैकल्पिक उपाय अपनाने की तैयारी कर रहा है। चीन इन घटनाक्रमों पर करीब से नजर रखेगा और अपने वैध अधिकारों की मजबूती से रक्षा करेगा।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर बिफरे ट्रंप
शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि राष्ट्रपति ट्रंप के पास 1977 के ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट’ के तहत लगभग सभी अमेरिकी व्यापारिक भागीदारों से आने वाले सामानों पर व्यापक आयात शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है। चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत का फैसला लिखते हुए स्पष्ट किया कि आईईईपीए आयात को विनियमित करने का अधिकार देता है, लेकिन इसमें टैरिफ या शुल्क का कोई जिक्र नहीं है। चीफ जस्टिस रॉबर्ट्स ने लिखा कि सरकार ने ऐसे किसी कानून की ओर इशारा नहीं किया है जिसमें कांग्रेस ने कराधान को अधिकृत करने के लिए ‘विनियमित’ शब्द का उपयोग किया हो। अब तक किसी भी राष्ट्रपति ने को इस तरह की शक्ति प्रदान करने वाला नहीं माना है ।
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