तीन दिन तक चली आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक में लिया निर्णय
RBI Repo Rate (द भारत ख़बर), नई दिल्ली : पश्चिम एशिया तनाव के चलते लगातार बढ़ रही महंगाई के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रेपो रेट स्थिर रखने का निर्णय लिया है। यह निर्णय तीन दिन तक चली आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति बैठक में लिया गया है। इस संबंधी विस्तार से जानकारी देते हुए आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति के सदस्यों ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला किया है।
बुधवार से चल रही एमपीसी की तीन दिवसीय गहन चर्चा के बाद यह महत्वपूर्ण घोषणा की गई। उन्होंने कहा कि सभी सदस्य इस बात से सहमत हुए की पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव और इसके कारण महंगाई और आर्थिक विकास पर मंडराते जोखिमों के बीच रेपो रेट में कोई बदलाव न किया जाए।
नहीं बढ़ेगी लोन की किस्त
एमपीसी ने सर्वसम्मति से ब्याज दरों में यथास्थिति बनाए रखने और ‘तटस्थ’ रुख अपनाने का निर्णय लिया है। देश की आर्थिक स्थिति को लेकर आश्वस्त करते हुए गवर्नर मल्होत्रा ने साफ किया कि भारत की घरेलू आर्थिक गतिविधियां काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं, जो मौजूदा माहौल में अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत और सकारात्मक संकेत है। अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण पर बात करते हुए गवर्नर ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था फिलहाल अभूतपूर्व चुनौतियों और अनिश्चितताओं से घिरी हुई है। ऊर्जा की ऊंची कीमतों का सीधा असर विकास दर में नरमी और महंगाई में वृद्धि के रूप में देखने को मिल रहा है।
उन्होंने बताया कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर अभी भी लक्ष्य से नीचे है, लेकिन इसमें ऊपर की ओर जाने का रुझान बना हुआ है। इन गंभीर वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद, आरबीआई गवर्नर ने भरोसा जताया कि भारत न्यूनतम नुकसान के साथ इन वैश्विक झटकों का मजबूती से सामना करने में सक्षम है। आगे की नीति के लिए एमपीसी पूरी तरह से आंकड़ों पर निर्भर रहेगी और आपूर्ति पक्ष के दबावों सहित अन्य विकासों पर करीब से नजर रखेगी।
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