आरबीआई ने जीडीपी ग्रोथ रेट 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 किया
GDP Growth Rate (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध और पश्चिम एशिया संकट का असर भारत की विकास दर पर पड़ना लगभग तय हो चुका है। ज्ञात रहे कि इस तनाव के चलते पिछले करीब तीन माह से होर्मुज जलडमरूमध्य बंद पड़ा है। हालांकि इस दौरान भारत के कई जहाज इसमें से निकले हैं लेकिन फिर भी कच्चे तेल और एलपीजी की कमी के चलते इनकी कीमतों में लगातार तेजी आ रही है।
इसी बीच आरबीआई ने अपनी मौद्रिक समिति की बैठक में बढ़ती महंगाई और रुपए की हालत को मद्देनजर रखते हुए भारतीय जीडीपी की विकास दर का अनुमान कम करते हुए इसे 6.9 से 6.6 कर दिया है। इस संबंधी जानकारी देते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि वेस्ट एशिया (मध्य पूर्व) में चल रहे तनाव और सप्लाई चेन में रुकावटों के चलते आर्थिक विकास दर यानी जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को घटा दिया है। अब चालू वित्त वर्ष-27 के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान को 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया गया है।
पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने के होते हैं दीर्घकालिक प्रभाव
इस बात पर विस्तार से चर्चा करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि मई महीने से अब तक पेट्रोल की कीमतों में कुल 7.4 प्रतिशत और डीजल की कीमतों में 8.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसका असर केवल यहीं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि धीरे-धीरे अन्य वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी दिखाई देगा।
बढ़ती महंगाई पर आरबीआई चिंतित
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि हालांकि रिटेल महंगाई अभी टारगेट के दायरे में है, लेकिन वैश्विक तनाव के कारण फ्यूल (ईंधन) और एनर्जी की बढ़ती कीमतें आगे चलकर खुदरा बाजार और आम जनता की जेब पर दबाव डाल सकती हैं। वहीं उन्होंने पश्चिम-दक्षिण मानसून में कमी (कम बारिश) के अनुमान को लेकर भी चिंता जताई गई है। मल्होत्रा ने कहा कि इसका सीधा असर खेती-किसानी की पैदावार और ग्रामीण इलाकों में मांग पर पड़ सकता है। हालांकि, सरकार की फसल विविधीकरण यानी डायवर्सिफिकेशन जैसी योजनाएं इसके असर को कम करने में मदद करेंगी।

