भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट, सेंसेक्स 961.42 तो निफ्टी में आई 317.90 अंक की गिरावट
Share Market Update (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : एशिया व वैश्विक बाजारों के मिले जुले प्रदर्शन, भू राजनीतिक दबाव और अमेरिकी टैरिफ की अस्पष्ट स्थिति एक बार फिर से भारतीय शेयर बाजार के नकारात्मक साबित हुई। शेयर बाजार ने शुक्रवार को एक बार फिर से बड़ा गोता लगाया और दिन का बाजार बंद होने के समय 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 961.42 अंक या 1.17 प्रतिशत गिरकर 81,287.19 पर बंद हुआ।
दिन के दौरान इसमें 1,089.46 अंक या 1.32 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 81,159.15 पर पहुंचा। 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 317.90 अंक या 1.25 प्रतिशत गिरकर 25,178.65 पर बंद हुआ। भारी गिरावट के चलते शुक्रवार को निवेशकों की संपत्ति में 4.98 लाख करोड़ रुपये की कमी आई। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण एक ही दिन में 4,98,603.42 करोड़ रुपये घटकर 4,63,50,671.27 करोड़ रुपये (5.10 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर) हो गया।
इन कंपनियों के शेयरों को सबसे ज्यादा नुकसान
सेंसेक्स पैक में, सन फार्मा, भारती एयरटेल, बजाज फिनसर्व, इंटरग्लोब एविएशन, महिंद्रा एंड महिंद्रा और मारुति प्रमुख रूप से पिछड़ने वाले शेयरों में शामिल थे। जानकारों ने इस गिरावट के पीछे वैश्विक बाजार के कमजोर संकेतों और बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों को बताया है। अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता में प्रगति न होने से मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने की आशंकाएं बढ़ गई हैं। वहीं कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी अनिश्चितता भी सुरक्षित निवेश की ओर आकर्षित हो रही है। उन्होंने कहा कि घरेलू स्तर पर, आय सत्र समाप्त होने और वैश्विक मैक्रो कारकों के हावी होने के कारण जोखिम से बचने का माहौल बना हुआ है।
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में आई गिरावट
रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट आई है। आरबीआई द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों की बात करें तो 20 फरवरी को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 2.119 अरब डॉलर की गिरावट आई है। इस कमी के बाद देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 723.608 अरब डॉलर के स्तर पर आ गया है।ज्ञात रहे कि इससे पहले एक सप्ताह यह 8.663 अरब डॉलर की बड़ी छलांग लगाते हुए 725.727 अरब डॉलर के नए सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था। ऐतिहासिक ऊंचाई को छूने के ठीक बाद आई यह 2.11 अरब डॉलर की कमी मुख्य रूप से वैश्विक स्तर पर गैर-अमेरिकी मुद्राओं और सोने के मूल्य में हुए उतार-चढ़ाव के प्रभाव को दर्शाती है।
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