युद्ध लंबा चला तो भारत सहित अन्य देशों की विकास दर पर पड़ेगा असर : रिपोर्ट
US-Iran War Effect on Global Supply (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर न केवल ईरान, इजरायल और अमेरिका पर पड़ रहा है। बल्कि इसका सीधा असर विश्व के अन्य देशों पर भी पड़ रहा है। विशेषकर एशिया में इस युद्ध के चलते सप्लाई चेन बाधित होने से जरूरी वस्तुओं की किल्लत साफ नजर आने लगी है।
इसी के चलते कई देशों मे पेट्रोल-डीजल और एलपीजी के दाम आसमान छूने लगे हैं। फिलहाल अमेरिका और ईरान की तरफ से इस युद्ध को समाप्त करने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाता दिखाई नहीं दे रहा। जिसका सीधा असर आने वाले दिनों में एशिया-प्रशांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देगा।
रेटिंग रिपोर्ट में यह आया सामने
अगर यह संकट लंबा चलता है तो 2026-27 के दौरान क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि में 1.3 फीसदी अंक तक गिरावट आ सकती है, जबकि महंगाई 3.2 फीसदी बढ़ सकती है। कहा जा रहा कि संघर्ष का असर मुख्य रूप से महंगे ऊर्जा शुल्क, आपूर्ति शृंखला में बाधा, व्यापार में रुकावट और वित्तीय परिस्थितियों के सख्त होने के रूप में सामने आ रहा है। रेटिंग एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, एशिया के देशों का पश्चिम से सीधा व्यापार भले कम हो, लेकिन वे ऊर्जा आयात और वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर निर्भर होने के कारण ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।
रेटिंग एजेंसियों ने खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य का जिक्र किया है, जहां से दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल और गैस की सप्लाई गुजरती है। इसका बड़ा हिस्सा एशिया तक पहुंचता है। मौजूदा तनाव के कारण यहां शिपिंग प्रभावित हुई है, जिससे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया और कुछ समय के लिए यह 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। इसके अलावा, वित्तीय बाजारों में भी तनाव दिखा। शेयर बाजार गिरे हैं और बॉन्ड यील्ड बढ़ी है। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि कीमतों को पूरी तरह नियंत्रित करने के बजाय उन्हें आंशिक रूप से बढ़ने दिया जाए, ताकि ऊर्जा स्रोतों की बचत हो और वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा मिले। केंद्रीय बैंक महंगाई पर नजर रखें और बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव को रोकें।
आर्थिक गतिविधियों पर पड़ेगा विपरीत प्रभाव
रेटिंग एजेंसी इक्रा का कहना है, अगर संघर्ष जल्दी खत्म हो जाता है तो इसका असर सीमित रह सकता है। अगर हालात लंबे समय ऐसे ही तक बने रहते हैं तो यह क्षेत्र की आर्थिक संभावनाओं को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। एशियाई विकास बैंक ने सरकारों को सलाह दी है कि वे आर्थिक स्थिरता बनाए रखें, ऊर्जा की खपत को नियंत्रित करें और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर तेजी से काम करें। साथ ही, सब्सिडी और कीमत नियंत्रण के बजाय जरूरतमंद वर्गों के लिए सीमित समय के समर्थन उपाय अपनाने पर जोर दिया गया है।
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