पश्चिम एशिया संकट का प्रभाव सीमित, देश की कर्ज अदायगी पर नहीं पड़ा असर : एक्जिम बैंक
Business News Hindi (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : पिछले करीब एक साल से भारत सहित पूरा विश्व अलग तरह की परिस्थितियों का सामना कर रहा है। अप्रैल 2025 में जहां अमेरिकी टैरिफ की नई दरों के चलते विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं पर नकारात्मक असर हुआ था तो इस साल फरवरी से अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुए युद्ध के चलते विश्व सप्लाई चेन बुरी तरह से प्रभावित हुई है। जिससे कई देश जरूरी वस्तुओं की किल्लत का सामना कर रहे हैं। इससे उनकी अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ने की पूरी संभावना है। इसी बीच भारत को लेकर आयात-निर्यात बैंक (एक्जिम बैंक) ने सकारात्मक रिपोर्ट पेश की है।
एक्जिम बैंक ने रिपोर्ट में यह बताया
ईरान-अमेरिका युद्ध के बाद भी भारत की कर्ज चुकाने की क्षमता मजबूत बनी हुई है। आयात-निर्यात बैंक (एक्जिम बैंक) ने कहा है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का भारतीय कंपनियों की कर्ज अदायगी पर अब तक कोई असर नहीं पड़ा है। आयात-निर्यात बैंक की एमडी और सीईओ हर्षा बंगारी ने बताया कि भले ही पश्चिम एशिया में कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियों की गतिविधियों पर हाल के महीनों में कुछ असर पड़ा हो, लेकिन उनकी ऋण चुकाने (पुनर्भुगतान) की क्षमता मजबूत बनी हुई है।
स्थिर और भरोसेमंद आर्थिक बुनियाद ने वैश्विक अनिश्चितता के दौर में कंपनियों को वित्तीय संकट में फंसने से बचाया है। भारतीय कंपनियों की मजबूती का मुख्य कारण उनके राजस्व स्रोतों का विविधीकरण है। यह सिर्फ पश्चिम एशिया के देशों तक सीमित नहीं हैं। हालांकि, यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो कंपनियों के लिए बहुत-सी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
शीर्ष कंपनियों के मुनाफे में आ सकती है कमी
यदि ऊर्जा कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो 2026-27 में देश की शीर्ष 100 कंपनियों की आय में 15 से 20 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है। इससे कर्ज बढ़ेगा जो अंतत: उनकी वित्तीय स्थिति पर दबाव डालेगा। बड़ी कंपनियों का कर्ज से कमाई अनुपात (लीवरेज) 0.5 से एक गुना तक बढ़ सकता है। रुपये में जारी कमजोरी से एक्जिम बैंक को फायदा हो सकता है। बैंक का बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा में होता है, ऐसे में बैलेंस शीट मजबूत हो सकती है। मौजूदा परिस्थितियों में रुपये में कर्ज लेने को प्राथमिकता दी जा रही है।
ये दो सेक्टर हैं ज्यादा संवेदनशील
रिफाइनिंग और एविएशन सेक्टर सबसे अधिक संवेदनशील हैं। ऊर्जा आयात पर निर्भर होने के कारण सीमेंट, धातु और स्टील जैसे क्षेत्र भी जोखिम में हैं। ईधन और खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी से लोगों की क्रय शक्ति घट सकती है, जिसका असर बैंकिंग क्षेत्र पर भी पड़ेगा।
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