ट्रंप ने बराक ओबामा और जो बाइडन की ओर से किए गए संयुक्त व्यापक कार्य योजना की आलोचना की
US-Iran Peace Agreement (द भारत ख़बर), वॉशिंगटन : अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे विवाद के बीच एक बार फिर से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते की बात कही है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता जल्द होगा और यह एक बेहतर समझौता होगा। ट्रंप ने कहा कि ईरान के लिए यह जरूरी है कि वह युद्ध की जिद छोड़कर अमेरिका की बात माने और अपनी बर्बादी को रोके।
वहीं ट्रंप ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और जो बाइडन की ओर से किए गए संयुक्त व्यापक कार्य योजना (जेसीपीओए) की आलोचना करते हुए कहा कि वर्तमान समझौता उससे कहीं बेहतर होगा। यहां जेसीपीओए का मतलब ओबामा और बाइडन के कार्यकाल में ईरान के साथ किए गए परमाणु समझौते से है।
पुराना समझौता अमेरिका के लिए खतरनाक
ट्रंप ने उस पुराने समझौते को अमेरिका की सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक और सबसे खराब समझौतों में से एक बताया। ट्रंप ने दावा किया कि उस समझौते से ईरान को परमाणु हथियार बनाने का रास्ता मिल सकता था, जिसे उनकी सरकार ने रोका। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उस समय ईरान को अरबों डॉलर नकद में दिए गए और यह पैसा अमेरिकी बैंकों से निकाला गया।
ट्रंप के अनुसार, अगर वह समझौता खत्म नहीं किया गया होता, तो पश्चिम एशिया और इस्राइल समेत कई क्षेत्रों में परमाणु हथियारों का खतरा बढ़ सकता था। उन्होंने कहा कि अगर उनके नेतृत्व में कोई नया समझौता होता है, तो वह पूरी दुनिया में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करेगा और पिछली सरकारों की गलतियों को सुधारेगा।
धमकियों के साए में नहीं होगी बातचीत
ईरान की संसद के अध्यक्ष और वातार्कार मोहम्मद गालिबाफ ने कहा कि देश धमकियों के दबाव में किसी भी तरह की बातचीत नहीं करेगा। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि अगर वार्ता विफल होती है तो ईरान ने नई सैन्य क्षमताओं की तैयारी भी कर ली है। गालिबाफ ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ट्रंप घेराबंदी करके और युद्धविराम का उल्लंघन करके अपनी कल्पना में इस बातचीत की मेज को समर्पण की मेज बनाना चाहते हैं या फिर नए युद्ध को उचित ठहराना चाहते हैं।उन्होंने आगे कहा, हम धमकियों के साए में बातचीत स्वीकार नहीं करते।

