डोडा के पास जम्मू-श्रीनगर राष्टÑीय राजमार्ग-44 पर हुआ भूस्खलन, राजमार्ग बाधित, दो दिन पहले हिमाचल के चंबा में भी हुई ऐसी ही घटना
Jammu-Kashmir Landslide (द भारत ख़बर), नई दिल्ली : देश के पहाड़ी राज्यों में मानसून से पहले ही पहाड़ों और ग्लेशियरों का टूटना शुरू हो चुका है। जिसने भू वैज्ञानिकों को हैरत में डाल दिया है। ज्ञात रहे कि पिछले साल मानसून सीजन के दौरान हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में भूसख्लन की सैकड़ों घटनाएं सामने आई। जिसमें सैकड़ों लोगों की मौत हो गई और लाखों करोड़ रुपए की सरकारी और नीजि संपत्ति का नुकसान हुआ था। वहीं इस बार पहाड़ दरकने की घटनाएं अभी से ही शुरू हो चुकी है।
ऐसी ही एक घटना जम्मू-कश्मीर में डोडा के पास और रामबन के बनिहाल में शनिवार तड़के भूस्खलन होने से डोडा-किश्तवाड़ और जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर दोनों तरफ से यातायात ठप हो गया। सैकड़ों वाहन फंस गए हैं। करीब 10 घंटे की मशक्कत के बाद डोडा-किश्तवाड़ राजमार्ग को एक तरफ से खोला जा सका है। दोनों सड़कों पर पूरी तरह से मलबा हटाकर यातायात बहाल करने की कोशिश जारी है, लेकिन इसमें समय लग सकता है। इसलिए यात्रियों को वैकल्पिक मार्गों से निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
दो दिन पहले चंबा में टूटा था ग्लेशियर
चंबा बैरागढ़ सच्चे जोत (साच पास) मार्ग पर वीरवार शाम के समय सरतरूंडी के समीप कर्थनाला के पास बड़ा ग्लेशियर गिरकर सड़क पर आ गय। जिस समय ग्लेशियर टूटा उस दौरान विभागीय मजदूर सड़क मार्ग की बहाली के कार्य में जुटे थे। सड़क पर कार्य कर रहे इन मजदूरों को जैसे ही ऊपर की तरफ ग्लेशियर के टूटने की आवाज सुनाई दी व काफी मात्रा में टूट कर बर्फ को नीचे गिरता देख इन सभी कर्मचारियों ने यहां से इधर-उधर भाग कर जान बचाई। अगर विभागीय कर्मचारी ग्लेशियर के टूटने की घटना को कुछ समय पहले नहीं भांप पाते तो बड़ा हादसा हो सकता था। फिलहाल सड़क बहाली के कार्य में जुटे सभी मजदूर सुरक्षित हैं।
कुल्लू में वाहन पर गिरा पेड़, चार महिलाओं की मौत
जानकारी के अनुसार, हिमाचल के कुल्लू जिले के आनी क्षेत्र में तेज हवा के चलते वाहन पर चिड़ का पेड़ गिरा। वाहन में छह महिला शिक्षक सवार थीं, जिनमें से चार की मौत हो गई और दो गंभीर रूप से घायल हुई हैं। घायलों को क्षेत्र के खनेरी स्थित सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश में शिमला और कांगड़ा के कुछ क्षेत्रों में बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई है और तेज हवाएं भी चली हैं। इससे नोग वैली और आसपास के क्षेत्रों में सेब की फसलों को नुकसान पहुंचा है।
पिछले साल मानसून के दौरान हुई तबाही
मानसून के दौरान केवल हिमाचल प्रदेश में ही 146 से अधिक बड़े भूस्खलन दर्ज किए गए। इसके अलावा, राज्य में 46 बार बादल फटने की घटनाएं हुईं। 5 अगस्त 2025 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली और आसपास के इलाकों में भीषण भूस्खलन और बादल फटने से भारी तबाही हुई, जिसमें लगभग 70 लोगों की जान गई। केवल हिमाचल में ही 400 से अधिक लोगों की जान गई। 27 अगस्त 2025 को जम्मू-कश्मीर में वैष्णो देवी के पास एक बड़ा भूस्खलन हुआ, जिसमें कम से कम 30 लोगों की मौत हुई।
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