अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के चलते अमेरिका में लगातार बढ़ रही महंगाई
Donald Trump on Iran War (द भारत ख़बर), वॉशिंगटन : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जब से दूसरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति का कार्यभार संभाला है तभी से वे हैरानीजनक फैसले ले रहे हैं। ट्रंप के फैसलों की मार अमेरिकी जनता पर लगातार पड़ रही है। पहले जहां ट्रंप ने अपनी नई टैरिफ नीति के चलते दुनिया भर के दर्जनों देशों को मुश्किल में डालने के साथ ही जहां अमेरिकी अर्थव्यवस्था का नुकसान किया अब वहीं वह ईरान के खिलाफ बीती 28 फरवरी से लगातार युद्ध छेड़े हुए है।
अमेरिकी वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब अमेरिका को किसी युद्ध में इतना ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा हो। इसी के चलते अमेरिका में महंगाई दर तीन साल के उच्च स्तर पर पहुंच चुकी है। इसी बीच अमेरिकी राष्टÑपति का एक बेहद चौकाने वाला बयान सामने आया है। आम लोगों को बढ़ती महंगाई से बचाने के उपाय करने की बजाय ट्रंप ने कहा है कि उन्हें महंगाई पसंद है।
बीएलएस के आंकड़ों पर ये बोले ट्रंप
अमेरिकी श्रम सांख्यिकी ब्यूरो (बीएलएस) के आंकड़ों के मुताबिक मई में उपभोक्ता कीमतें सालाना आधार पर 4.2% बढ़ीं। अप्रैल में यह दर 3.8% थी। महंगाई के आंकड़े जारी होने के बाद ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में कहा, “मुझे यह पसंद है। आंकड़े शानदार थे। आपको पता है मुझे सबसे ज्यादा क्या पसंद है? मुझे महंगाई पसंद है। हालांकि बाद में उन्होंने न्यूयॉर्क पोस्ट से कहा कि उनका आशय यह था कि महंगाई दर अनुमान से कम रही है, जबकि ईरान युद्ध जारी है। ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान के साथ संघर्ष खत्म होने के बाद तेल की कीमतें तेजी से गिरेंगी और महंगाई भी कम हो जाएगी।
अमेरिका को अभी तक इतना नुकसान हो चुका
ईरान के खिलाफ जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ताबड़तोड़ हमले किए थे तो शायद अमेरिका को भी यह अनुमान नहीं था कि यह युद्ध इतना लंबा खिंचेगा। पहले ही झटके में जब अमेरिका ने ईरान के सुप्रीम नेता सहित करीब चार दर्जन नेता और सैन्य अधिकारियों को मौत के घाट उतार दिया था तो उसे लगा होगा की ईरान कुछ ही दिन में घुटने टेक देगा। लेकिन ईरान ने पलटवार करते हुए अमेरिकी सेना को इस युद्ध में भारी नुकसान पहुंचाया है। एक रिपोर्ट के अनुसार इस युद्ध में अमेरिका को सीधे युद्ध खर्च और नष्ट हुए सैन्य उपकरणों के रूप में अरबों डॉलर (लगभग 25 अरब से 1 ट्रिलियन डॉलर के बीच) का प्रत्यक्ष नुकसान हुआ है।
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