नई दिल्ली. देशभर में राजनीतिक माहौल गुरुवार को बेहद गरम रहने वाला है. बिहार की बांकीपुर, मध्य प्रदेश की दतिया और गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए गुरुवार (30 जुलाई) को मतदान होगा. तीनों सीटों पर चुनाव प्रचार खत्म हो चुका है. अब उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला मतदाताओं के हाथ में होगा. इन उपचुनावों पर जनता ने किसे चुना 3 अगस्त को नतीजा आने के बाद पता चलेगा. भाजपा और कांग्रेस ने इन सीटों पर पूरी ताकत झोंक दी है, जबकि बिहार में जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर भी चुनावी मुकाबले को दिलचस्प बना रहे हैं.
पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट इस बार सबसे ज्यादा चर्चा में है. यह सीट लंबे समय से भाजपा का गढ़ रही है. पूर्व विधायक और वर्तमान भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद विधानसभा सदस्यता छोड़ने से यह सीट खाली हुई थी. भाजपा ने इस बार नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है. जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर पहली बार चुनावी राजनीति में उतरकर सीधे भाजपा को चुनौती दे रहे हैं. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने रेखा गुप्ता को मैदान में उतारा है, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है.
मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर मुकाबला सीधे भाजपा और कांग्रेस के बीच है. कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता अदालत से सजा मिलने के बाद समाप्त हो गई थी, जिसके चलते यहां उपचुनाव कराया जा रहा है. भाजपा ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने घनश्याम सिंह को मैदान में उतारा है. घनश्याम सिंह स्थानीय पूर्व शाही परिवार से जुड़े माने जाते हैं. भाजपा उम्मीदवार की घोषणा के समय पार्टी के कुछ स्थानीय नेताओं की नाराजगी भी चर्चा में रही थी.
गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है. भाजपा विधायक योगेश पटेल के निधन के बाद यह सीट खाली हुई थी. भाजपा ने सतीश पटेल को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने पूर्व राज्य मंत्री और प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष भीखाभाई रबारी को चुनाव मैदान में उतारा है. दोनों दलों ने इस सीट पर जोरदार प्रचार किया है और जीत के लिए पूरी ताकत लगा दी है.
चुनाव आयोग ने तीनों राज्यों में मतदान की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं. सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं और संवेदनशील मतदान केंद्रों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहेगा. मतदान के बाद ईवीएम को कड़ी सुरक्षा के बीच स्ट्रॉन्ग रूम में रखा जाएगा. अब सबकी निगाहें 3 अगस्त पर टिकी हैं, जब मतगणना के साथ यह साफ हो जाएगा कि भाजपा अपने गढ़ बचाने में सफल रहती है या कांग्रेस और अन्य दल कोई बड़ा उलटफेर करने में कामयाब होते हैं.

