चंडीगढ़. पंजाब विश्वविद्यालय में मंगलवार को बारिश के बीच करंट लगने से पीएचडी स्कॉलर ज्योति की मौत हो गई. छात्रा की मौत के बाद छात्र भड़क गए और फिर कई घंटे तक बवाल होता रहा. छात्र वीसी दफ्तर के बाद धरने पर बैठ गए. वहीं, परिजनों ने छात्रा का शव लेने से इंकार कर दिया था. हालांकि, बाद में परिजनों की मांगों को यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने मान लिया. ऐसे में अब छात्रा के परिवार को 23 लाख रुपये मुआवजा और भाई को यूनिवर्सिटी में नौकरी दी जाएगी.
ज्योति के मामा जितेंद्र ने देर शाम को मीडिया से बातचीत में कहा कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने हमारी मांगे मान ली हैं.
उधर, चंडीगढ़ में कुलपति प्रो. रेनू विग ने माइक्रोबायोलॉजी विभाग की शोध छात्रा ज्योति के निधन पर गहरा दुख और शोक व्यक्त किया है. प्रो. रेनू विग ने कहा कि विश्वविद्यालय परिवार के लिए यह अपूरणीय क्षति है. उन्होंने कहा कि इस दुख की घड़ी में पूरा विश्वविद्यालय परिवार शोकाकुल परिवार के साथ मजबूती से खड़ा है और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता है. कुलपति ने परिवार से मुलाकात कर उन्हें हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया. उन्होंने कहा कि परिवार की मांगों को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय ने परिवार को आर्थिक सहायता तथा पात्र परिवार सदस्य को रोजगार उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है. गौर रहे कि ज्योति के भाई को यूनिवर्सिटी में इलेक्ट्रिशियन की नौकरी दी जाएगी.
रेवाड़ी की रहने वाली थी ज्योति
पीएचडी स्कॉलर ज्योति के पिता रविंद्र किसान हैं और परिवार में एक भाई और एक बहन हैं. भाई पवन गुरुग्राम की निजी कंपनी में नौकरी करता है. ज्योति पढ़ाई में काफी होशियार थी. उसने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) से बीएससी, हिसार से एमएससी की पढ़ाई की थी. ज्योति करीब दो महीने पहले ही अपने घर आई थी. ज्योति साइंटिस्ट बनना चाहती थी. घटना के दौरान वह फोन पर मां से बात कर रही थी.
क्या है मामला
दरअसल, चंडीगढ़ में मंगलवार को भारी बारिश हुई और जगह जगह जलभराव हो गया. इस दौरान यूनिवर्सिटी में हॉस्टल नंबर 8 से होते हुए ज्योति हॉस्टल नंबर 10 की तरफ जा रही थी और इस दौरान फुटपाथ से जैसी निकली तो उसे करंट ललगा और वह वहीं गिर गई. उसे 16 अस्पताल में लेकर जाया गया जहां उसकी मौत हो चुकी है. घटना के बाद छात्र भड़क गए और वीसी दफ्तर का गेट तोड़ दिय़ा और साथ ही बिजली दफ्तर की तालाबंदी भी कर दी थी.
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